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बदहाल स्टेडियम: करोड़ों की लागत के बाद भी अलीगंज के खिलाड़ियों को नहीं मिल रहीं बुनियादी अभ्यास सुविधाएं
अलीगंज में करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए आधुनिक स्टेडियम की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिसके कारण स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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Ankit Yadav
25 अग 2026, 12:41
उत्तर प्रदेश के अलीगंज क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से भारी-भरकम सरकारी बजट खर्च करके एक भव्य स्टेडियम का निर्माण करवाया गया था। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण और शहरी इलाकों के उभरते हुए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना था ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी ट्रेनिंग जारी रख सकें। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है, और यह बहुप्रतीक्षित खेल परिसर आज अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हुआ यह ढांचा अब धीरे-धीरे बर्बाद हो रहा है।
बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव
स्टेडियम के भीतर खिलाड़ियों के लिए जरूरी मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर का घोर संकट बना हुआ है। मैदान की समय पर घास कटाई नहीं होने और मिट्टी समतल न होने के कारण प्रैक्टिस करने वाले युवाओं को गंभीर चोटें लगने का खतरा लगातार बना रहता है। इसके अलावा, इंडोर ट्रेनिंग हॉल, चेंजिंग रूम, और आधुनिक जिम उपकरणों जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं या तो गायब हैं या फिर पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पड़ी हैं। शाम के वक्त अभ्यास करने वाले एथलीटों के लिए फ्लडलाइट्स की उचित व्यवस्था न होना भी एक बहुत बड़ी समस्या है, जिससे सर्दियों के दिनों में या सूरज ढलने के बाद ट्रेनिंग सेशन बीच में ही रोकने पड़ते हैं। पीने के साफ पानी और प्रसाधन कक्ष जैसी प्राथमिक चीजें भी इस परिसर में नदारद हैं, जिससे महिला और पुरुष खिलाड़ियों दोनों को अत्यधिक दुश्वारियों से गुजरना पड़ता है।
खिलाड़ियों में गहराता रोष और निराशा
इस खेल परिसर के निर्माण के वक्त स्थानीय युवाओं में एक नई उम्मीद जागी थी कि उन्हें अब अपने कौशल को बेहतर करने के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, जमीनी हालात देखकर अब खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों के भीतर भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त हो चुका है। कई उभरते हुए क्रिकेटरों, फुटबॉलरों और एथलीटों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों तथा स्थानीय प्रशासन को कई बार अपनी इन गंभीर समस्याओं से अवगत कराया है, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं। खेल मैदान की ऐसी दयनीय स्थिति के चलते माता-पिता भी अपने बच्चों को यहां भेजने से कतराने लगे हैं, जिससे इस क्षेत्र की खेल संस्कृति को करारा झटका लग रहा है।
सुधार के नाम पर केवल खानापूर्ति
खेलप्रेमियों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस स्टेडियम के नाम पर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और वास्तविक धरातल पर किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं होता। करोड़ों के सरकारी फंड का किस प्रकार उपयोग हुआ है, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग भी अब जोर पकड़ने लगी है। यदि समय रहते इस स्थिति में सुधार नहीं लाया गया, तो यह बहुमूल्य खेल संपत्ति पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो जाएगी। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और शासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए कब तक उचित कदम उठाते हैं ताकि खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।