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बड़ी लापरवाही: बदायूं के स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिछले दो सालों से नहीं है फुटबॉल का कोच
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्थित खेल स्टेडियम से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां पिछले दो लंबे वर्षों से फुटबॉल खेल के लिए किसी भी प्रशिक्षक या कोच की नियुक्ति नहीं की गई है।
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Ankit Yadav
08 सित 2026, 12:23
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के दावे अक्सर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। ऐसा ही एक ताजा मामला बदायूं जिले से सामने आया है, जहां स्थानीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेल के लिए पिछले दो साल से कोई अधिकृत कोच मौजूद नहीं है। इस स्थिति के कारण यहां अभ्यास करने आने वाले युवा खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटका हुआ दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय पर स्थित इस स्टेडियम में यूं तो कई खेलों के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, लेकिन जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की उदासीनता के चलते फुटबॉल के खिलाड़ियों को बिना मार्गदर्शन के ही अपना पसीना बहाना पड़ रहा है।
खिलाड़ियों का भविष्य संकट में
बदायूं और आसपास के इलाकों में फुटबॉल के प्रति युवाओं का क्रेज लगातार बढ़ रहा है, और तमाम छात्र तथा युवा अपनी प्रतिभा को तराशने के लिए रोजाना इस स्टेडियम का रुख करते हैं। लेकिन एक प्रशिक्षित मार्गदर्शक या कोच के अभाव में उनकी प्रतिभा कुंद होती जा रही है। बिना किसी विशेषज्ञ के प्रशिक्षण के, युवा खिलाड़ी केवल अपने दम पर या सीनियर खिलाड़ियों की मदद से बुनियादी अभ्यास करने को मजबूर हैं। खेल प्रेमियों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जिले से बेहतरीन फुटबॉल प्रतिभाएं उभरने से पहले ही दम तोड़ देंगी। कोच न होने के कारण कई उभरते हुए खिलाड़ी दूसरे जिलों या निजी अकादमियों का रुख करने को विवश हो रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
इस मामले को लेकर स्थानीय खेल प्रेमियों और जागरूक नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि सरकार और खेल विभाग की ओर से खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे बड़े-बड़े अभियान चलाए जाते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को बढ़ावा मिल सके। इसके बावजूद, जिला स्तर के स्टेडियमों में यदि बुनियादी पदों जैसे कि फुटबॉल कोच की सीट दो साल तक खाली पड़ी रहे, तो इन अभियानों के उद्देश्यों पर गंभीर सवालिया निशान लगना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई या नई नियुक्ति का आदेश जारी नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की सुस्ती साफ झलकती है।
जल्द नियुक्ति की उठी मांग
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए खेल जगत से जुड़े लोगों और स्थानीय संघों ने जिला प्रशासन तथा उत्तर प्रदेश शासन के खेल निदेशालय से पुरजोर मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए। नागरिकों की मांग है कि बदायूं स्पोर्ट्स स्टेडियम में तत्काल प्रभाव से एक योग्य और अनुभवी फुटबॉल कोच की नियुक्ति की जाए, ताकि युवा खिलाड़ियों को पेशेवर मार्गदर्शन मिल सके। इसके अलावा, स्टेडियम की अन्य खेल सुविधाओं और रखरखाव की स्थिति की भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है। यदि आने वाले दिनों में प्रशासन इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की भी चेतावनी दी जा रही है, ताकि शासन-प्रशासन की नींद खुल सके और युवा खिलाड़ियों के हक की लड़ाई लड़ी जा सके।