एशियन गेम्स 2026 के आयोजन के नजदीक आते ही भारतीय खेल जगत में पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले क्रिकेट और हॉकी के अलावा कई अन्य वैकल्पिक और कम पहचान वाले खेलों पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है। आमतौर पर भारतीय मीडिया और दर्शकों का पूरा फोकस मुख्यधारा के खेलों पर ही रहता है, जिसके कारण कई ऐसे रोमांचक मुकाबले और स्पर्धाएं पीछे छूट जाती हैं जहां देश के एथलीटों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का सुनहरा अवसर होता है। इस बार खेल विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि यदि भारतीय ओलंपिक संघ और संबंधित खेल महासंघ इन उपेक्षित स्पर्धाओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को समय पर सही सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक समर्थन मुहैया कराएं, तो पदक तालिका का आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से काफी ऊपर जा सकता है।
यदि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारतीय एथलेटिक्स, शूटिंग और कुश्ती जैसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को छोड़कर महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं में हमेशा से कुछ विशेष खेलों पर अत्यधिक निर्भरता रही है, जबकि अन्य तकनीकी और कम लोकप्रिय स्पर्धाओं में आधारभूत ढांचे की कमी के कारण प्रतिभाएं उभर नहीं पाती हैं। एशियाई खेलों के इतिहास में कई ऐसे अनुशासन शामिल हैं जिनमें एशिया के दूसरे देश जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया वर्षों से अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं और लगातार शीर्ष स्थान पर काबिज रहते हैं क्योंकि वे शुरुआती स्तर से ही इन विधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हैं। भारत में हाल के वर्षों में खेल संस्कृति के विकास के बावजूद इन अनजान खेलों के प्रति लोगों की जागरूकता और प्रायोजकों की रुचि में भारी कमी देखी गई है, जिसके कारण प्रतिभावान खिलाड़ियों को अपने दम पर ही तमाम आर्थिक और सामाजिक बाधाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ना पड़ता है।
इस आगामी महाकुंभ में यदि भारतीय खिलाड़ी इन अप्रचलित और कम चर्चित स्पर्धाओं में पदक जीतने में सफल रहते हैं, तो यह न केवल देश के खेल इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगा बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए खेलों के चयन का दायरा भी काफी विस्तृत कर देगा। खेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों और कोचों का भी मानना है कि पारंपरिक खेलों पर से दबाव को कम करने और समग्र खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि विभिन्न विधाओं में समान रूप से निवेश किया जाए और जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज अभियानों को बढ़ावा दिया जाए। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारतीय दल इन अनछुए मैदानों पर किस प्रकार की रणनीति के साथ उतरता है और क्या हमारे खिलाड़ी इन चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में देश की उम्मीदों को नया आसमान दे पाते हैं या नहीं।