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खेल

हॉकी का खराब सफर: वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का निराशाजनक प्रदर्शन और खिलाड़ियों का संकट

हाल ही में समाप्त हुए हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय राष्ट्रीय टीम के बेहद खराब और शर्मनाक प्रदर्शन के बाद खेल गलियारों में मंथन का दौर शुरू हो गया है। टीम की इस नाकामी के पीछे कोचिंग स्टाफ की रणनीति, कप्तान के फैसले और अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश के संन्यास के बाद उनकी जगह लेने वाले उपयुक्त विकल्प का न होना मुख्य वजहें मानी जा रही हैं।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 17:43
हॉकी का खराब सफर: वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का निराशाजनक प्रदर्शन और खिलाड़ियों का संकट
भारतीय हॉकी टीम को इस विश्व कप महाकुंभ में एक बेहद शर्मनाक और निराशाजनक दौर से गुजरना पड़ा। वैश्विक स्तर पर कभी हॉकी की सिरमौर रही भारतीय टीम का इस तरह मैदान पर बिखर जाना देश भर के खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। टूर्नामेंट के दौरान टीम की फील्ड पर रणनीतिक कमजोरी खुलकर सामने आई, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या मौजूदा कोचिंग सेटअप टीम को दबाव के क्षणों में संभालने में पूरी तरह सक्षम था या नहीं। मैदान पर खिलाड़ियों का तालमेल भी उस स्तर का नजर नहीं आया जिसकी उम्मीद एक विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में की जाती है।

कोचिंग और कप्तानी पर उठे गंभीर सवाल

मैच दर मैच टीम के लचर प्रदर्शन ने कोच और कप्तान की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आधुनिक हॉकी की तेज रफ्तार और रणनीतिक बारीकियों के आगे भारतीय खेमा काफी लाचार नजर आया। महत्वपूर्ण मुकाबलों में खिलाड़ियों का सही इस्तेमाल न होना और मैदान पर गलत फैसले लेना हार का बड़ा कारण बना। कप्तान और कोच की जोड़ी टीम में वह प्रेरणा और ऊर्जा जगाने में नाकामयाब रही जो किसी भी कठिन परिस्थिति से उबारने के लिए जरूरी होती है। नतीजतन, खिलाड़ियों का मनोबल भी गिरा हुआ दिखा और वे दबाव के पलों में बिखर गए।

श्रीजेश के बाद गोलकीपिंग का खालीपन

इस असफलता के पीछे एक सबसे बड़ा और गंभीर कारण दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश के संन्यास के बाद उनके योग्य विकल्प का न मिलना भी रहा है। सालों तक भारतीय दीवार बनकर गोलपोस्ट की रक्षा करने वाले श्रीजेश की कमी इस टूर्नामेंट में हर पल खलती रही। उनके जाने के बाद टीम मैनेजमेंट ऐसा कोई भी भरोसेमंद और अनुभवी गोलकीपर तैयार नहीं कर पाया जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी ही दीवार खड़ी कर सके। अनुभवहीनता के चलते महत्वपूर्ण क्षणों में गोलकीपिंग पर बढ़ा दबाव टीम की हार का एक बड़ा सबब बन गया, जिस पर अब भारतीय हॉकी फेडरेशन को गंभीरता से विचार करना होगा। खेल जानकारों और पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भी भारतीय हॉकी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि खेल प्रशासक इस असफलता से क्या सबक लेते हैं और क्या आने वाले दिनों में भारतीय हॉकी ढांचे में कोई बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं ताकि टीम फिर से अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पा सके।
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