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करारा जवाब: क्रांति गौड़ पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले पाकिस्तानी फैंस की हुई किरकिरी, भारत की शानदार जीत ने बंद की बोलती
खेल के मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन की बजाय उनके शरीर और शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करना सोशल मीडिया पर एक बेहद नकारात्मक और शर्मनाक चलन बनता जा रहा है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया जब कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और फैंस ने क्रांति गौड़ को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक और बॉडी-शेमिंग टिप्पणियां कीं। हालांकि, मैदान पर भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन और ऐतिहासिक जीत ने इन आलोचकों को ऐसा करारा जवाब दिया कि उनकी बोलती पूरी तरह से बंद हो गई। इस घटना ने एक बार फिर वायह साबित कर दिया क
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 13:58
सोशल मीडिया का मंच आजकल खेल भावना से परे जाकर खिलाड़ियों की व्यक्तिगत जिंदगी और उनके शारीरिक गठन पर छींटाकशी करने का एक नया अखाड़ा बनता जा रहा है। हाल ही की एक घटना में, कुछ पाकिस्तानी प्रशंसकों ने अनुचित टिप्पणियां करते हुए क्रांति गौड़ को निशाना बनाया। इस तरह की ओछी हरकतें न केवल खेल की मूल भावना के खिलाफ हैं, बल्कि यह ऑनलाइन ट्रोलिंग की उस मानसिकता को भी उजागर करती हैं जो अक्सर हार या कुंठा से उत्पन्न होती है। खिलाड़ियों का समर्थन करना या उनकी आलोचना खेल के दायरे तक सीमित होनी चाहिए, लेकिन जब बात व्यक्तिगत हमलों और शरीर की बनावट का मजाक उड़ाने पर आ जाए, तो यह बेहद निंदनीय हो जाता है। खेल प्रेमियों और विभिन्न खेल मंचों ने इस प्रकार के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है और इसे खेल के मैदान की गरिमा के खिलाफ बताया है।
मैदान पर भारतीय जीत ने आलोचकों को सिखाया सबक
क्रिकेट और अन्य खेल प्रतियोगिताओं में जब भी इस तरह की नकारात्मक टिप्पणियां सामने आती हैं, तो खिलाड़ियों के प्रशंसक हमेशा उनके समर्थन में खड़े नजर आते हैं। इस विशेष प्रकरण में भी, भारतीय टीम की शानदार और दमदार जीत ने उन सभी ट्रोलर्स के मुंह पर ताला लगा दिया जो सोशल मीडिया के जरिए अपनी कुंठा निकाल रहे थे। खेल के मैदान पर जब कोई खिलाड़ी या टीम अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती है, तो इस तरह की क्षुद्र आलोचनाएं अपने आप दम तोड़ देती हैं। मैदान पर मिला यह करारा जवाब सिर्फ एक स्कोरबोर्ड की जीत नहीं थी, बल्कि यह साबित करने का एक बेहतरीन तरीका था कि कड़ी मेहनत और प्रतिभा हमेशा नफरत और ट्रोलिंग पर भारी पड़ती है। भारतीय समर्थकों ने भी इस जीत का जश्न मनाते हुए इन आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया और अपनी टीम के प्रति पूरा समर्थन जताया।
सोशल मीडिया पर इस प्रकार की घटनाओं के बाद अब एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर कड़े नियम होने चाहिए। खेल संगठनों और सोशल मीडिया कंपनियों को मिलकर ऐसे एल्गोरिदम और नीतियों पर काम करना चाहिए जो खिलाड़ियों के खिलाफ अभद्र भाषा, नस्लवाद और बॉडी-शेमिंग को तुरंत रोक सकें। उत्तर प्रदेश और देश भर के खेल प्रेमियों में भी इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि कैसे खेल को हमेशा राजनीति और इस तरह की ओछी हरकतों से दूर रखा जाना चाहिए। आखिरकार, खेल का असली मकसद लोगों को जोड़ना औरसकारात्मकता फैलाना है, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
आने वाले दिनों में खेल आयोजकों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि वे खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएं। जब तक दर्शक और फैंस खेल को केवल मनोरंजन और प्रतिस्पर्धा के रूप में देखना नहीं सीखेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं समाज में नकारात्मकता फैलाती रहेंगी। हालांकि, क्रांति गौड़ के मामले में जिस प्रकार से भारतीय जीत ने आलोचकों को खामोश किया, उसने यह दिखा दिया कि मैदान का प्रदर्शन ही हर आलोचक का सबसे सटीक और करारा जवाब होता है।