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खेलकूद के फायदे: राजमुनि देवी ने शारीरिक और मानसिक विकास को बताया अहम
खेलकूद के महत्व को रेखांकित करते हुए राजमुनि देवी ने कहा है कि शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए खेलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 14:10
खेलों की महत्ता हमारे जीवन में सदियों से रही है, लेकिन आधुनिक दौर में इसकी आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है। इसी संदर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए राजमुनि देवी ने स्पष्ट किया है कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारे समग्र व्यक्तित्व निर्माण की धुरी हैं। नियमित रूप से खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने से न केवल हमारी मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि हमारी सोचने-समझने की क्षमता और मानसिक सतर्कता में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलता है। आज के समय में युवाओं और बच्चों के लिए मैदान पर उतरना उतना ही जरूरी है जितना कि किताबों से अध्ययन करना, क्योंकिताकि उनका शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर संतुलित विकास हो सके।
शारीरिक स्वास्थ्य और फिटनेस की अनिवार्यता
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बीमारियां और तनाव आम होते जा रहे हैं, जिनसे निपटने का सबसे बेहतरीन जरिया खेलकूद को माना गया है। जब कोई व्यक्ति किसी भी खेल में भाग लेता है, तो उसके शरीर की सक्रियता बढ़ती है जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। राजमुनि देवी के विचारों के माध्यम से यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा रहा है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। बच्चे हों या युवा, यदि वे नियमित रूप से खेलकूद से जुड़े रहते हैं, तो वे कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता से आसानी से दूर रह सकते हैं। खेलों के जरिए अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व जैसे अमूल्य गुणों का विकास भी होता है जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।
मानसिक दृढ़ता और तनाव मुक्ति में सहायक
शारीरिक लाभों के अलावा, खेल मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। अकादमिक और कामकाजी दबाव के इस युग में मानसिक शांति पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है, और ऐसे में खेलकूद एक बेहतरीन थेरेपी का काम करते हैं। जब कोई मैदान पर खेलता है, तो उसका पूरा ध्यान खेल की रणनीति पर होता है, जिससे दैनिक जीवन का तनाव और चिंता स्वतः समाप्त हो जाती है। यह मानसिक विश्राम व्यक्ति को अधिक ऊर्जावान और सकारात्मक बनाता है। राजमुनि देवी ने इस बात पर जोर दिया है कि मानसिक रूप से मजबूत पीढ़ी तैयार करने के लिए शिक्षण संस्थानों और स्थानीय स्तर पर खेल के मैदानों का होना और वहां नियमित गतिविधियां आयोजित होना बहुत जरूरी है।
भविष्य की दिशा और सामाजिक सहभागिता
खेलों के प्रति इस प्रकार की सकारात्मक सोच और जागरूकता आने वाले समय में एक स्वस्थ समाज की नींव रखेगी। जब माता-पिता और समाज के जिम्मेदार लोग खेलकूद को उतनी ही अहमियत देंगे जितनी कि अन्य औपचारिक शिक्षा को, तभी एक समग्र रूप से विकसित समाज का सपना सच हो सकता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भी खेल मैदानों के विकास और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके। राजमुनि देवी का यह बयान समाज को एक नई दिशा देने वाला है, जो हर नागरिक को खेल के मैदान की ओर लौटने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित करता है।