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खेल और खिल: जो खेलेगा वो खिलेगा, पीएम मोदी ने युवा एथलीटों से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया डायलॉग के दौरान युवा एथलीटों से संवाद करते हुए 'जो खेलेगा वो खिलेगा' का संदेश दिया और ओलंपिक में देश की भागीदारी को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

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Ankit Yadav
27 अग 2026, 19:07
खेल और खिल: जो खेलेगा वो खिलेगा, पीएम मोदी ने युवा एथलीटों से की बात
देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से आए उभरते हुए खिलाड़ियों और युवा एथलीटों के साथ सीधे संवाद किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खेल के महत्व को रेखांकित करते हुए एक बेहद प्रेरणादायक बात कही कि जो खेलेगा, वही जीवन में खिलेगा। उनका यह मंत्र देश के कोने-कोने में खेल के प्रति उत्साह जगाने और युवाओं को मैदान से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

ओलंपिक भागीदारी बढ़ाने का संकल्प

प्रधानमंत्री ने इस चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि आने वाले समय में वैश्विक मंचों विशेषकर ओलंपिक खेलों में भारत की उपस्थिति और भागीदारी को और अधिक व्यापक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश के युवा हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवा रहे हैं, और खेल के मैदान पर भी भारत का तिरंगा शान से लहराना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि प्रतिभाओं को सही समय पर सही मार्गदर्शन, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत देश भर के विभिन्न खेल परिसरों और अकादमियों में इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा गया। लखनऊ के स्थानीय खेलप्रेमियों और युवा खिलाड़ियों ने भी प्रधानमंत्री के इस संवाद को बहुत ध्यान से सुना और इसे अपने खेल करियर के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया। जानकारों का मानना है कि इस तरह के संवाद कार्यक्रमों से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। सरकार की ओर से खेलो इंडिया अभियान के तहत लगातार देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से खेल प्रतिभाओं को तराशने का काम किया जा रहा है। खेलो इंडिया डायलॉग जैसे मंचों के माध्यम से जब देश का शीर्ष नेतृत्व सीधे युवाओं से संवाद करता है, तो इससे एथलीटों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। आने वाले दिनों में खेल मंत्रालय और विभिन्न खेल महासंघों द्वारा इस दिशा में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना है, जिससे भारत को एक उभरती हुई खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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