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खेल बजट पर बड़ा खुलासा: एशियाई खेलों के लिए 503 एथलीटों पर खर्च हुए 702 करोड़ रुपये

एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन और उस पर हुए वित्तीय खर्च को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें बताया गया है कि सरकार और संबंधित खेल निकायों ने तैयारी और भागीदारी पर बड़ी राशि का निवेश किया है।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 17:27
खेल बजट पर बड़ा खुलासा: एशियाई खेलों के लिए 503 एथलीटों पर खर्च हुए 702 करोड़ रुपये
भारतीय खेल जगत से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है जिसके अनुसार आगामी या हालिया एशियाई खेलों के अभियान के लिए देश के कुल 503 खिलाड़ियों के ऊपर सरकार और खेल प्राधिकरणों द्वारा भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, उनकी विदेश यात्राओं, कोचिंग स्टाफ, उच्च श्रेणी की खेल सुविधाओं और अन्य आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कुल 702 करोड़ रुपये का भारी खर्च आया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगे का मान बढ़ाने के लिए किस स्तर पर वित्तीय संसाधन झोंके जा रहे हैं।

खिलाड़ियों की तैयारी और बेहतर प्रदर्शन का दबाव

पैराग्राफ दो में यदि हम इस बात पर गौर करें कि इतनी बड़ी धनराशि का आवंटन क्यों किया गया है, तो इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक तालिका में सुधार करने की मजबूत राजनीतिक और खेल नीति नजर आती है। एशियाई खेल जैसे महाकुंभ में भाग लेना किसी भी एथलीट के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, और इसके लिए आधुनिक तकनीक, विदेशी प्रशिक्षण शिविर और मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता होती है। इन सभी आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही 702 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम का उपयोग किया गया है ताकि हमारे खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की बुनियादी कमी का सामना न करना पड़े और वे पूरी तरह से केवल अपने खेल प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। पैराग्राफ तीन में चर्चा करें तो खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ का यह हमेशा से प्रयास रहा है कि ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों जैसे बड़े आयोजनों से पहले एथलीटों को हर संभव सहायता मुहैया कराई जाए। हालांकि, इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद अब खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों की निगाहें इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं कि क्या वे इस भारी निवेश के अनुपात में देश के लिए पदक जीतकर लाएं हैं या नहीं। वित्तीय पारदर्शिता और खेल प्रबंधन के लिहाज से भी इस तरह के बड़े खर्चों का मूल्यांकन करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि आने वाले समय में अन्य टूर्नामेंटों के लिए भी बेहतर रणनीति बनाई जा सके। पैराग्राफ चार के तहत भविष्य की संभावनाओं को देखें तो इस प्रकार के भारी-भरकम निवेश से देश के युवा खिलाड़ियों में एक सकारात्मक संदेश जाता है कि सरकार उनके भविष्य और खेल करियर को लेकर पूरी तरह गंभीर है। खेल विज्ञान, न्यूट्रिशन और विश्वस्तरीय कोचिंग पर विशेष ध्यान देने के कारण भारतीय एथलीट अब एशियाई और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले वर्षों में खेल बजट के और अधिक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है ताकि भारत आने वाले ओलंपिक और अन्य प्रमुख बहु-विषयक खेल आयोजनों में एक महाशक्ति के रूप में उभर सके और हमारे खिलाड़ी वैश्विक पटल पर नए कीर्तिमान स्थापित कर सकें।
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