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खेल जगत में कमाल: मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना से 180 से अधिक खिलाड़ियों को मिला संबल

देश के खेल परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं जिससे रग्बी से लेकर पारा-स्पोर्ट्स तक में देश का नाम रोशन हो रहा है।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 11:30
खेल जगत में कमाल: मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना से 180 से अधिक खिलाड़ियों को मिला संबल
भारतीय खेल जगत के लिए यह एक बेहद उत्साहजनक समय है, जहाँ विभिन्न खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकार और संबंधित खेल प्राधिकरणों द्वारा लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' जैसी कल्याणकारी और प्रेरणादायक योजनाओं ने देश के प्रतिभाशाली एथलीटों का भविष्य सुरक्षित करने में एक मील का पत्थर साबित कदम उठाया है। इस अनूठी पहल के माध्यम से अब तक देश भर के 180 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी क्षेत्र में नौकरियां मिल चुकी हैं, जिससे उनके खेलकूद के करियर को एक नया संबल और आर्थिक स्थिरता प्राप्त हुई है। इस व्यवस्था से खिलाड़ियों को अपनी आजीविका की चिंता से मुक्ति मिलती है और वे पूरी तरह से अपने खेल व देश के लिए पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।

रग्बी और पारा-स्पोर्ट्स में बढ़ता दबदबा

देश में पारंपरिक खेलों के अलावा अब रग्बी और पारा-स्पोर्ट्स जैसी चुनौतीपूर्ण विधाओं में भी युवा प्रतिभाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना परचम लहरा रही हैं। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि इसने पारंपरिक रूप से मुख्यधारा में कम आंके जाने वाले खेलों के खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। पारा-एथलीटों और रग्बी खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि यदि उन्हें उचित अवसर, संसाधन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाए, तो वे किसी भी वैश्विक प्रतियोगिता में देश का सिर गर्व से ऊंचा कर सकते हैं। इन खिलाड़ियों की सफलताएं आज के युवा वर्ग के लिए एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं जो खेल को ही अपना भविष्य और करियर बनाना चाहते हैं। आने वाले समय में खेल प्रशासन और अधिक ऐसी नीतियां लाने पर विचार कर रहा है जिससे जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को खोजा जा सके और उन्हें शुरुआती चरण से ही प्रशिक्षित किया जा सके। इस तरह की रोजगारोन्मुखी योजनाओं के विस्तार से न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विभिन्न राज्यों से निकलकर आने वाली छुपी हुई प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित करने का खुला मंच मिलेगा। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल महाकुंभों में पदकों की संख्या के मामले में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा, जिससे देश का गौरव और अधिक बढ़ेगा।
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