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महामुकाबले की तैयारी: एशियन गेम्स 2026 के लिए भारत ने साधे 36 खेल और 503 खिलाड़ी
महाद्वीपीय खेलों के आगामी संस्करण के लिए भारतीय खेल जगत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, जिसमें एक मजबूत और प्रशिक्षित दल को मैदान में उतारने की पूरी योजना बनाई गई है।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 12:11
आगामी महाद्वीपीय खेल आयोजनों के मद्देनजर देश के खेल प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार भारत की ओर से कौन-कौन से एथलीट विभिन्न स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे और वे किस प्रकार का प्रदर्शन कर पाएंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भारतीय दल ने इस बार एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत खिलाड़ियों के चयन से लेकर उनके प्रशिक्षण तक हर पहलू पर बारीकी से काम किया जा रहा है। खेल मंत्रालय और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे एथलीटों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
दल का विस्तृत आकार और संरचना
प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आगामी प्रतिष्ठित बहु-खेल आयोजन के लिए भारत की तरफ से कुल 36 विभिन्न खेलों में शिरकत की जाएगी। इसके लिए एक भारी-भरकम और संतुलित दल तैयार किया गया है, जिसमें कुल 503 मेधावी खिलाड़ी शामिल किए गए हैं। इन खिलाड़ियों का चयन उनके पिछले प्रदर्शन, निरंतरता और मौजूदा फॉर्म के आधार पर किया गया है ताकि वे वैश्विक मंच पर देश की उम्मीदों पर खरा उतर सकें। केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उनके पीछे काम करने वाले तकनीकी स्टाफ, कोच, फिजियोथैरेपिस्ट, डॉक्टर और अन्य विशेषज्ञों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, इस बार कुल 246 सपोर्ट स्टाफ को भी दल का हिस्सा बनाया गया है जो एथलीटों की हर संभव मदद करेंगे ताकि वे बिना किसी मानसिक या शारीरिक दबाव के केवल अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
पिछले प्रदर्शन से सीख और नई उम्मीदें
विगत कुछ वर्षों में भारतीय एथलीटों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विशेषकर पिछले महाद्वीपीय खेलों में जिस प्रकार का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है, उसने देशवासियों की उम्मीदों को काफी बढ़ा दिया है। ट्रैक और फील्ड से लेकर विभिन्न व्यक्तिगत तथा टीम स्पर्धाओं में भारत ने अपनी धाक जमाई है। इस बार का यह बड़ा दल इस बात का प्रमाण है कि देश में खेलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है और पारंपरिक खेलों के अलावा अन्य विधाओं में भी युवा प्रतिभाएं तेजी से उभर रही हैं। खेल संघों का मुख्य उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक श्रेणियों में भागीदारी सुनिश्चित की जाए और पदक तालिका में देश की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। सरकार की ओर से भी एथलीटों को हर संभव वित्तीय और ढांचागत सहायता प्रदान की जा रही है ताकि प्रशिक्षण शिविरों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
आगामी चुनौतियां और पदक की संभावनाएं
जैसे-जैसे प्रतियोगिता की शुरुआत की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे खिलाड़ियों का अभ्यास और अधिक कठिन होता जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि एशियाई देशों के कई अन्य राष्ट्र भी अपने खेल ढांचे को तेजी से विकसित कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय दल के भीतर जिस प्रकार का उत्साह और अनुशासन देखने को मिल रहा है, उससे यह उम्मीद बंधती है कि हमारे खिलाड़ी हर चुनौती का डटकर मुकाबला करेंगे। सपोर्ट स्टाफ की इतनी बड़ी संख्या इस बात को सुनिश्चित करेगी कि खिलाड़ियों को रिकवरी, डाइट और तकनीकी विश्लेषण में किसी प्रकार की असुविधा न हो। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि यह बड़ा दल किस प्रकार अपनी तैयारियों को सफलता में बदलता है और देश के लिए कितने पदक जीतकर लौटता है।