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खेल

व्यवस्था की मार: चार स्वर्ण पदक जीतने वाला एथलीट बेचने को मजबूर सब्जी

खेल के मैदान पर देश और राज्य का नाम रोशन करने वाले एक होनहार खिलाड़ी को आज अपने परिवार का पेट पालने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद सरकारी नौकरी के वादे पूरे न होने के कारण यह खिलाड़ी संघर्ष की जिंदगी जी रहा है।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 16:30
व्यवस्था की मार: चार स्वर्ण पदक जीतने वाला एथलीट बेचने को मजबूर सब्जी
देश के लिए खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले और चार स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाले एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी की वर्तमान स्थिति ने खेल व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। जिस युवा को खेल अकादमी या किसी सरकारी पद पर देश का गौरव बढ़ाना चाहिए था, वह आज जीवनयापन के लिए ठेले पर सब्जियां बेचने की विवशता झेल रहा है। इस खिलाड़ी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर कई मंचों पर सफलता हासिल की, लेकिन खेल जगत में मिलने वाली चमक-धमक से कोसों दूर उसका निजी जीवन आज गहरे आर्थिक संकट और निराशा के साए में बीत रहा है।

सरकारी नौकरी के झूठे आश्वासन

विजयी अभियानों के दौरान इस खिलाड़ी को कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं द्वारा बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए थे। यह उम्मीद बंधाई गई थी कि खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद उसे सरकारी सेवा में उचित स्थान मिलेगा, जिससे उसका और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके। हालांकि, समय बीतने के साथ ये तमाम वादे सिर्फ कागजी और खोखले साबित हुए। वर्षों बीत जाने के बाद भी जब किसी प्रकार की सरकारी सहायता या नौकरी का प्रस्ताव नहीं मिला, तो परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उसे मजबूरन सब्जी बेचने का कठिन रास्ता चुनना पड़ा।

प्रशासनिक उदासीनता और निराशा

हमारे देश में खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए तमाम नीतियां और योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय बनी रहती है। इस खिलाड़ी की कहानी केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं की व्यथा को दर्शाती है जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर पदक तो जीत लेते हैं, परंतु सिस्टम की उदासीनता के कारण हाशिए पर चले जाते हैं। स्थानीय स्तर पर इस मामले के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक देश का नाम रोशन करने वाले एथलीटों को इस तरह की उपेक्षा का सामना करना पड़ेगा। भविष्य को लेकर इस खिलाड़ी के मन में अब भी थोड़ी उम्मीद ब बची है कि शायद सरकार और खेल मंत्रालय की नजर इस ओर पड़े। यदि समय रहते ऐसे मेधावी खिलाड़ियों की सुधि नहीं ली गई, तो देश की युवा प्रतिभाओं का खेल से मोहभंग होने में देर नहीं लगेगी। जनता और खेल जगत से जुड़े लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि संबंधित विभाग तुरंत इस मामले का संज्ञान ले और इस चार बार के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को उसकी योग्यता के अनुरूप सरकारी नौकरी प्रदान करे ताकि उसका जीवन पटरी पर लौट सके।
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