राज्य स्तरीय कलारिपयट्टू प्रतियोगिता में लखनऊ का दबदबा राजधानी के प्रतिष्ठित केडी सिंह बाबू स्टेडियम में संपन्न हुई राज्य स्तरीय कलारिपयट्टू प्रतियोगिता में लखनऊ की टीम ने ऐतिहासिक और अत्यंत प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए कुल 7 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस प्रमुख खेल आयोजन में उत्तर प्रदेश के कुल 18 मंडलों से आए हुए प्रतिभाशाली और ऊर्जावान खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस प्राचीन युद्ध कला की विभिन्न विधाओं में अपनी अद्भुत फुर्ती तथा तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों और खेल प्रेमियों को पारंपरिक मार्शल आर्ट्स के एक से बढ़कर एक बेहतरीन मुकाबले देखने को मिले, जहां हर एक प्रतियोगी ने स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। लखनऊ के खिलाड़ियों ने विशेष रूप से अपने अनुशासन, सटीक हमलों और रक्षात्मक कौशल के बल पर निर्णायक बढ़त बनाई और अंततः सर्वाधिक 7 स्वर्ण पदक जीतकर इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप पर अपना कब्जा जमाया। इस शानदार सफलता के बाद स्थानीय खेल जगत और विजेता खिलाड़ियों के परिवारों में जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि इस ऐतिहासिक जीत ने क्षेत्रीय खेल मानचित्र पर राजधानी का गौरव एक बार फिर बहुत ऊंचे स्तर पर स्थापित कर दिया है।
पारंपरिक युद्ध कला को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच कलारिपयट्टू जैसी प्राचीन और समृद्ध भारतीय युद्ध कला को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करने तथा इसे युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से ऐसे राज्य स्तरीय आयोजनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। केडी सिंह बाबू स्टेडियम जैसे बड़े खेल परिसर में सूबे के 18 अलग-अलग प्रशासनिक मंडलों से खिलाड़ियों का एक स्थान पर एकत्र होना इस बात का प्रमाण है कि इस पारंपरिक विधा के प्रति युवाओं का रुझान लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इस प्रकार की प्रतियोगिताओं के आयोजन से न केवल जमीनी स्तर की खेल प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने के लिए एक उपयुक्त और पेशेवर मंच मिलता है, बल्कि विभिन्न जिलों के खिलाड़ियों को एक-दूसरे की तकनीकों को सीखने और समझने का बहुमूल्य अवसर भी प्राप्त होता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण और टूर्नामेंट आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों की स्थिति को और अधिक मजबूत करेंगे। इसके अलावा, पारंपरिक खेलों के प्रति प्रशासन और खेल संघों का बढ़ता हुआ सहयोग यह सुनिश्चित करता है कि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक और शारीरिक विरासत से जुड़ी रहें और आधुनिक प्रतिस्पर्धाओं में भी अपनी एक अलग पहचान बनाने में पूरी तरह से सफल हो सकें।
जीत के बाद खिलाड़ियों का भविष्य और आगामी खेल योजनाएं इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में असाधारण प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण पदक जीतने वाले लखनऊ के खिलाड़ियों के लिए यह सफलता भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों के द्वार खोलने का काम करेगी। स्थानीय खेल प्रशासक और प्रशिक्षक अब इन विजेता खिलाड़ियों के लिए विशेष और उन्नत प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि वे अपनी प्रतिभा को और अधिक निखार सकें और आगामी उच्च-स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन दोहरा सकें। इस बड़ी सफलता के बाद खेल विभाग और स्थानीय संघों पर भी यह जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे इन उभरती हुई खेल प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं, उचित पोषण और बेहतर मार्गदर्शन समय पर उपलब्ध कराएं। खेल प्रेमियों और जानकारों का मानना है कि यदि इन खिलाड़ियों को लगातार ऐसा ही प्रोत्साहन मिलता रहा, तो वे आने वाले समय में देश का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करने में पूरी तरह सक्षम साबित होंगे। प्रतियोगिता के समापन समारोह के दौरान सभी विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया और यह उम्मीद जताई गई कि यह जीत उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को एक नई दिशा और अभूतपूर्व गति प्रदान करेगी।