देश भर में खेलों के बुनियादी ढांचे और एथलीटों के उत्थान के लिए आवंटित होने वाले धन के इस्तेमाल पर अब पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में प्रमुख राजनीतिक नेता और पूर्व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यों के प्रशासनों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि खेलकूद के विकास के लिए भेजा जा रहा बजट वास्तव में किन योजनाओं और गतिविधियों पर खर्च किया जा रहा है। खेल मंत्रालय और विभिन्न प्रशासनिक निकायों द्वारा जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान किया जाता है, परंतु कई बार राज्यों से यह शिकायतें मिलती हैं कि धन का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, राज्यों से ब्योरा तलब किया जाना खेल प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा बजट में खासी बढ़ोतरी की गई है। खेलो इंडिया अभियान, राष्ट्रीय खेल विकास फंड और विभिन्न अकादमियों के माध्यम से देश के दूरदराज इलाकों तक खेल सुविधाओं का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, खेल बजट का एक बड़ा हिस्सा राज्यों के माध्यम से क्रियान्वित होने वाली परियोजनाओं में जाता है, जहां अक्सर पारदर्शिता और उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर न मिलने जैसी प्रशासनिक अड़चनें सामने आती रहती हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्य सरकारें अपने यहां मिलने वाले फंड का पाई-पाई का हिसाब नहीं देंगी, तब तक जमीनी स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा। इसी व्यवस्थागत खामी को दुरुस्त करने के लिए केंद्रीय स्तर पर सख्त निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अनुराग ठाकुर द्वारा राज्यों से मांगे गए इस हिसाब के बाद देश भर के खेल हलकों में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मांग का असर यह हो सकता है कि राज्य सरकारें खेल बजट के आवंटन और खर्च को लेकर अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनें। यदि सभी राज्य अपने यहां खेल विकास कार्यों का पारदर्शी ब्योरा सौंपते हैं, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सा राज्य खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में वास्तव में गंभीर है और कहां लापरवाही बरती जा रही है। इस प्रकार की समीक्षा से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि देश के होनहार खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएं मिलने का मार्ग भी प्रशस्त होगा, जिससे आने वाले वैश्विक टूर्नामेंट्स में भारत का प्रदर्शन और अधिक बेहतर हो सके।