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अमेरिकी विज्ञान में निवेश: डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर की नई योजनाओं का एलान किया

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 6 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय योजनाओं की घोषणा की है। इस पहल में सरकारी एजेंसियों, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 12:11
अमेरिकी विज्ञान में निवेश: डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर की नई योजनाओं का एलान किया

6 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी विज्ञान योजना

अमेरिका में वैज्ञानिक अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अरब डॉलर से अधिक के निवेश कार्यक्रमों को हरी झंडी दिखाई है। 'साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट' के दौरान इन योजनाओं का औपचारिक एलान किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोमेडिकल साइंस और परमाणु ऊर्जा संचालित अंतरिक्ष अन्वेषण को प्राथमिकता दी गई है। इस विशाल कार्यक्रम का लक्ष्य अमेरिकी तकनीकी प्रभुत्व को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करना है। इसके तहत सरकारी एजेंसियों के साथ निजी तकनीकी कंपनियों और प्रमुख विश्वविद्यालयों को एक मंच पर लाकर शोध कार्य को गति दी जाएगी। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह प्रयास ऊर्जा, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रही वैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए शुरू किया गया है। पंद्रह से अधिक संघीय एजेंसियां इस साझा प्रयास में सहयोग करेंगी ताकि देश की वैज्ञानिक क्षमता को बढ़ाया जा सके। यह नीतिगत कदम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के अनुसंधान ढांचे के पुनर्गठन जितना ही प्रभावी और क्रांतिकारी माना जा रहा है।

कंपनियों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी

जेनेसिस मिशन के तहत 11 प्रमुख उद्योग भागीदारों ने 2.4 अरब डॉलर के कंप्यूटिंग संसाधनों और तकनीकी सहायता का वादा किया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सुपरइंटेलिजेंस का उपयोग करके वैज्ञानिक खोजों की प्रक्रिया को तेज करना है। एनवीडिया ने 1 अरब डॉलर, एएमडी ने 50 करोड़ डॉलर, जबकि ओपनएआई ने 20 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा गूगल और एंथ्रोपिक ने 15-15 करोड़ डॉलर की मदद देने का निर्णय लिया है। अमेज़न वेब सर्विसेज और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस तकनीकी बुनियादी ढांचे को विकसित करने में सहयोग करेंगी। सरकार ने एक अरब डॉलर का निवेश वैज्ञानिक कंप्यूटिंग और कार्यबल प्रशिक्षण के लिए जॉर्जिया राज्य और विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर करने का निर्णय लिया है। इसमें दस राज्यों के चौदह से अधिक विश्वविद्यालय रीजनल कंप्यूटिंग कंसोर्टियम का हिस्सा बनेंगे, जबकि नॉर्थ और साउथ कैरोलिना की पांच यूनिवर्सिटी एक अलग रिसर्च हब स्थापित करेंगी। नेशनल साइंस फाउंडेशन और ऊर्जा विभाग ने उन्नत लैब उपकरणों के लिए 10 करोड़ डॉलर से अधिक का अतिरिक्त आवंटन किया है।

भविष्य की तकनीक और शोध का विस्तार

क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र में अमेरिका को अग्रणी बनाने के लिए ऊर्जा विभाग ने 21.5 करोड़ डॉलर की नई प्रतियोगिता शुरू की है, जिसका लक्ष्य फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर तैयार करना है। नासा और ऊर्जा विभाग मिलकर न्यूक्लियर-पावर्ड स्पेसक्राफ्ट और चंद्रमा पर फिशन रिएक्टर लगाने की परियोजनाओं पर काम करेंगे, जिसमें 2028 का मंगल मिशन भी शामिल है। बायोमेडिकल क्षेत्र में 1.8 अरब डॉलर का एक व्यापक प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से कोशिकाओं और जैविक प्रणालियों के वर्चुअल मॉडल बनाए जाएंगे। यह शोध बीमारियों के पनपने की प्रक्रिया को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा। जेनेसिस मिशन फेलोशिप के जरिए 10 करोड़ डॉलर का फंड उन डॉक्टोरल छात्रों के लिए रखा गया है, जो एआई को इंजीनियरिंग विषयों के साथ जोड़कर शोध कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक्स-लैब्स कंसोर्टियम को 31 करोड़ डॉलर की मदद दी जाएगी ताकि बहु-विषयक रिसर्च टीमों को सहायता मिल सके। यह पूरी पहल पहले से चल रहे 5 अरब डॉलर के जेनेसिस मिशन और 1.5 अरब डॉलर की नेशनल साइंस फाउंडेशन की स्वतंत्र रिसर्च पहल पर आधारित है ताकि भविष्य के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की एक सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके।

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