जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या
फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब
असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे
कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे
‘भारत हम सभी के लिए उम्मीद की किरण’, पोलैंड के प्रधानमंत्री ने की PM मोदी की जमकर तारीफ
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
अनोखी तकनीक: अब ट्रेनों के गुजरने पर पटरी की थरथराहट से बनेगी बिजली
भारतीय रेलवे के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी तकनीक सामने आई है, जिसके तहत पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों की थरथराहट से बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा और अब ट्रेनें ऊर्जा की खपत करने के बजाय ऊर्जा का निर्माण करेंगी।
A
Ankit Yadav
18 सित 2026, 13:56
रेलवे सेक्टर में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, अब ट्रेनें बिजली की केवल खपत करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पटरियों पर उनके चलने से उत्पन्न होने वाली कंपन और थरथराहट का उपयोग करके बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इस नई तकनीक के माध्यम से रेलवे नेटवर्क अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य व्यस्त रेल मार्गों पर इस तरह के नवाचारों से भविष्य में परिवहन प्रणाली को अत्यधिक ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा संकट से निपटने का अनूठा तरीका
देशभर में परिवहन प्रणालियों द्वारा भारी मात्रा में बिजली की खपत की जाती है, जिसके विकल्प के रूप में इस नई तकनीक को एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। जब कोई भारी-भरकम रेलगाड़ी तीव्र गति से पटरियों पर दौड़ती है, तो उससे जबरदस्त यांत्रिक कंपन यानी थरथराहट पैदा होती है। पारंपरिक रूप से इस ऊर्जा को व्यर्थ चला जाता देखा गया है, लेकिन इस अभिनव तकनीक के जरिए उसी कंपन को कैप्चर करके उपयोगी विद्युत ऊर्जा में तब्दील किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की प्रणालियों के व्यापक इस्तेमाल से न केवल रेलवे का बिजली का खर्च कम होगा, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी काफी मददगार साबित होगी।
राजधानी लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रमुख रेलवे स्टेशनों और पटरियों पर इस प्रकार के आधुनिक अनुसंधान और तकनीकों के आने से स्थानीय स्तर पर भी ऊर्जा के नए स्रोतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लखनऊ जैसे बड़े महानगरों में जहां ट्रेनों की आवाजाही दिन-रात बनी रहती है, वहां पटरियों के माध्यम से बिजली बनाने की यह तकनीक अत्यधिक प्रभावी साबित हो सकती है। रेलवे के इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ इस बात की संभावनाओं पर बारीकी से काम कर रहे हैं कि कैसे इसे व्यावहारिक रूप से पटरियों के नीचे स्थापित किया जाए ताकि सामान्य ट्रेन संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए और अधिकतम करंट का उत्पादन किया जा सके।
इस तकनीक के सफल क्रियान्वयन से आने वाले दिनों में भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रायल और पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए इसकी क्षमताओं को परखा जा रहा है, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक रहे तो इसे देश के बड़े रेल कॉरिडोर्स पर बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है। आम जनता और तकनीकी प्रेमियों के बीच भी इस नई पहल को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है, क्योंकि यह विज्ञान का एक ऐसा अनूठा उदाहरण है जो बर्बादी को मुनाफे और जरूरत में बदल रहा है।