इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के भीतर देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा देश में बनने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का 55 प्रतिशत उत्पादन भी इसी राज्य से हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को डबल इंजन सरकार ने जमीन पर उतारा है। सरकार ने इस दिशा में स्पष्ट नीतियां बनाकर निवेश और उत्पादन को बढ़ावा दिया है। जेवर क्षेत्र में 3706 करोड़ रुपये की लागत से एचसीएल फॉक्सकॉन चिप निर्माण इकाई का निर्माण कार्य चल रहा है। राज्य के भीतर तकनीक का यह विस्तार केवल असेंबली तक सीमित नहीं है बल्कि अब मॉड्यूल और माइक्रोचिप निर्माण तक पहुंच चुका है। भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ डेटा केंद्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। तकनीकी के इस बढ़ते दायरे से राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के नए और बड़े अवसर लगातार सृजित हो रहे हैं।
डेटा सेंटर और स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार
राज्य के भीतर अब तक 644 मेगावाट क्षमता वाले विभिन्न डेटा सेंटर प्रस्तावों पर मुहर लग चुकी है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की धरती पर 24000 से अधिक स्टार्टअप और कुल 8 यूनिकॉर्न कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामानों का उत्पादन बढ़ा वैसे-वैसे डेटा केंद्रों की मांग में भी भारी इजाफा हुआ है। इसी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटर से लेकर एआई सिटी तक का विकास किया जा रहा है ताकि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके। युवाओं को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से एआई प्रज्ञा माध्यम के जरिए 10 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री ने सहभागिता की। इस अवसर पर एचसीएल गुवी इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर का भी औपचारिक शुभारंभ किया गया है। यह संस्थान प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और उन्हें रोजगार की तलाश करने वाले की बजाय रोजगार देने वाला बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
पुरानी सरकारों पर निशाना और नई प्राथमिकताओं का असर
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश की असीम क्षमताओं का सही उपयोग करने के बजाय इसे बीमारू श्रेणी में ही बनाए रखा गया था। उस दौर में केवल बड़ी घोषणाएं होती थीं और परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए लंबे संघर्ष करती थीं। परिवारवाद ही उस समय का मुख्य विकास मॉडल बन चुका था जहां सैफई महोत्सव को सांस्कृतिक उत्थान मान लिया गया था और माफियाकरण को ही औद्योगिकीकरण का पैमाना बना दिया गया था। शासन की प्राथमिकताएं प्रदेश के हित की बजाय परिवार और निवेशकों की जगह अपराधियों के संरक्षण पर टिकी हुई थीं। लेकिन वर्तमान सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करते हुए परिवार के विकास की जगह पूरे प्रदेश के विकास को चुना। माफियाओं के संरक्षण को समाप्त करके निवेशकों को सुरक्षा प्रदान की गई और तुष्टिकरण की राजनीति के स्थान पर आधुनिक तकनीक को पूरी प्राथमिकता दी गई। कभी जो उत्तर प्रदेश केवल तकनीक का एक बड़ा बाजार हुआ करता था वह आज उसी तकनीक का प्रमुख निर्माता बन चुका है। असेंबली से लेकर एआई तक की यह पूरी यात्रा केवल तकनीक के विकास की नहीं बल्कि राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कहानी है।