पार्टनर चुनने में तकनीक से दूरी
आधुनिक युग में तकनीक हमारे जीवन के हर हिस्से में प्रवेश कर रही है और अब यह चलन डेटिंग ऐप्स तक पहुंच चुका है। लोग अपनी प्रोफाइल को अधिक आकर्षक बनाने के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं। वे अपना बायो लिखने और बातचीत के दौरान भाषा को सुधारने के लिए इस माध्यम की मदद ले रहे हैं। इसके बावजूद, जब बात किसी उपयुक्त साथी को चुनने की आती है, तो भारतीय सिंगल्स इसके प्रयोग को लेकर बिल्कुल भी सहज नहीं हैं। सामने आए ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल 46.6 प्रतिशत सिंगल्स का यह स्पष्ट मानना है कि डेटिंग के दौरान किसी भी स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, करीब 64.2 प्रतिशत लोग आधुनिक सुझावों के बजाय अपनी खुद की समझ और बुद्धि को ही सबसे अधिक अहमियत देते हैं। यह साफ दर्शाता है कि लोग अपने निजी जीवन और फैसलों के मामले में पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर होने से बच रहे हैं। वे किसी भी सॉफ्टवेयर या एल्गोरिदम की बजाय मानवीय संवेदनाओं और व्यक्तिगत निर्णयों को प्राथमिकता देना पसंद करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रोमांस के क्षेत्र में मानवीय दखल अभी भी सर्वोपरि बना हुआ है।
महिलाओं की राय और संदेशों की हकीकत
इस विषय पर महिलाओं की सोच बेहद स्पष्ट और दो टूक नजर आई है। सर्वेक्षण के दौरान सामने आया कि लगभग 60.5 प्रतिशत महिलाओं का यह मानना है कि डेटिंग में तकनीक का सहारा लेना खुद के प्रति पूरी तरह से सच्चा होना नहीं है। इसके साथ ही, लगभग 51.9 प्रतिशत महिलाएं ऐसी होती हैं जो किसी भी ऐसे शुरुआती संदेश को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं जिसे देखकर यह आभास होता है कि इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तैयार किया गया है। इससे यह बात साबित हो जाती है कि रोमांस और रिश्तों की शुरुआत में केवल सटीक और व्याकरण की दृष्टि से सही शब्दों का चयन करना ही पर्याप्त नहीं होता है। बातचीत के दौरान सहजता का होना और सामने वाले व्यक्ति की अपनी मौलिक आवाज का अहसास होना भी बेहद जरूरी माना जाता है। इसके विपरीत, कुछ लोग खुद इसके दोहरे मापदंड भी अपनाते नजर आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 24.3 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो खुद तो इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर उनका कोई मैच भी ऐसा ही करे तो उन्हें इस बात से गहरी आपत्ति होती है। इससे पता चलता है कि लोगों को अपनी प्रोफाइल चमकाने के लिए तो यह साधन स्वीकार्य है, लेकिन दूसरे व्यक्ति की तरफ से इसका प्रयोग भरोसे को सीधे तौर पर ठेस पहुंचा सकता है।
प्रोफाइल सुधार और मैसेज जांचने का नया चलन
एक तरफ जहां इस तकनीक को लेकर लोगों के मन में स्पष्ट हिचकिचाहट बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ व्यावहारिक जीवन में इसका उपयोग भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। लोग अपनी डेटिंग प्रोफाइल के बायो को बेहतर और आकर्षक बनाने के लिए इसका सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा, विभिन्न डेटिंग एप्लीकेशन पर उपयोगकर्ताओं को मिलने वाले प्रॉम्प्ट्स को लिखने के लिए भी इसकी मदद ली जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 51.2 प्रतिशत लोग किसी भी मैसेज को भेजने से पहले उसे इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से अच्छी तरह जांच लेते हैं। ऐसा करने से उन्हें संदेश की भाषा, उसमें उपयोग किए गए शब्दों और पूरी बात को सामने वाले के सामने पेश करने के तरीके को सुधारने में काफी मदद मिलती है। इस प्रकार से यह साफ हो जाता है कि डेटिंग की दुनिया में बातचीत को थोड़ा आसान और सहज बनाने के लिए तो इसका प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल भी अर्थ नहीं है कि लोग अपने जीवन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण निजी फैसले भी पूरी तरह से किसी तकनीक या एल्गोरिदम के हवाले करने के लिए तैयार हैं। मानवीय रिश्तों में आज भी सच्चाई, आपसी बातचीत और व्यक्तिगत जुड़ाव का महत्व सबसे ऊपर है और तकनीक केवल एक मामूली सहायक उपकरण बनकर ही रह गई है।