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टेक्नोलॉजी

एआई कैलकुलेटर: परीक्षाओं में नकल को लेकर बढ़ा नया खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के कैलकुलेटर तक पहुंचने से शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 11:38
एआई कैलकुलेटर: परीक्षाओं में नकल को लेकर बढ़ा नया खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर पारंपरिक गैजेट्स पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में तकनीकी बाजार में ऐसे कैलकुलेटर आने शुरू हो गए हैं जिनमें उन्नत एआई फीचर्स जोड़े गए हैं। इन आधुनिक उपकरणों के कारण शैक्षणिक जगत में परीक्षाओं के दौरान नकल की संभावनाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। शिक्षक और परीक्षा नियंत्रक इस बात से खासे परेशान हैं कि छात्र जटिल गणनाओं के अलावा एआई की मदद से सीधे जवाब भी हासिल कर सकते हैं।

परीक्षाओं की पारदर्शिता पर बड़ा संकट

पारंपरिक रूप से कैलकुलेटर का उपयोग केवल गणितीय और सांख्यिकीय समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता था, जिन्हें परीक्षा हॉल में अनुमति दी जाती थी। लेकिन अब जब इन उपकरणों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शक्ति जुड़ गई है, तो इनकी कार्यक्षमता पूरी तरह बदल चुकी है। ये नए एआई-सक्षम गैजेट न केवल कठिन समीकरणों को चुटकियों में हल कर सकते हैं, बल्कि विभिन्न विषयों के विस्तृत उत्तर भी प्रदर्शित करने में सक्षम हैं। इस स्थिति ने देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रशासकों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है कि परीक्षा हॉल में इनकी निगरानी कैसे की जाए। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणालियों और नियमों में तुरंत बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि इन नए गैजेट्स के दुरुपयोग को रोका जा सके। कई संस्थानों ने ऐसे उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार करना शुरू कर दिया है जो इंटरनेट से जुड़ सकते हैं या जिनमें स्मार्ट फीचर्स मौजूद हैं। इसके अलावा, प्रश्नपत्रों के पैटर्न को भी इस तरह से तैयार किया जा रहा है जहां केवल रटी-रटाई गणनाओं के बजाय विश्लेषणात्मक और तार्किक समझ का परीक्षण किया जा सके, ताकि छात्र किसी भी प्रकार की डिजिटल मदद का अनुचित लाभ न उठा सकें।

भविष्य की नीतियां और कड़े कदम

आने वाले समय में तकनीकी उन्नयन के साथ इस तरह के गैजेट्स पर नजर रखना और अधिक कठिन हो सकता है। परीक्षा बोर्ड और शिक्षक संघ अब सरकार तथा तकनीकी कंपनियों से यह मांग कर रहे हैं कि ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल को विनियमित किया जाए। आने वाले दिनों में परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच को और अधिक कड़ा किया जा सकता है ताकि किसी भी छात्र को अत्याधुनिक तकनीक का अवैध इस्तेमाल करने से रोका जा सके। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ेगी, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को भी अपनी सुरक्षा के नए तरीकों को अपनाना होगा।
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