एआई को रणनीति का मुख्य हिस्सा बनाना
भारत की व्यावसायिक कंपनियां इन दिनों कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग अपने कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए बड़े पैमाने पर कर रही हैं। डेल टेक्नोलॉजीज की आधुनिक उद्यम तत्परता अध्ययन 2026 में 35 देशों के कुल 2,950 लोगों को शामिल किया गया है। इस अध्ययन में भारत के 150 प्रमुख व्यापारिक और आईटी विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी है। निष्कर्षों के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत भारतीय संगठनों ने अब एआई को अपनी व्यावसायिक रणनीतियों का मुख्य केंद्र बनाया है। कंपनियां अपने दैनिक उत्पादन के स्तर पर अब नई तकनीकों को लागू कर रही हैं। भारत के 26 प्रतिशत संगठन अब एआई या जनरेटिव एआई समाधानों को सीधे अपने उत्पादन वातावरण में चला रहे हैं। एक साल पहले की तुलना में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत था। हालांकि अभी भी कई बड़े संस्थान बिना किसी स्पष्ट परिणाम और जोखिम प्रबंधन नीति के नई तकनीक के इस्तेमाल से बच रहे हैं।
सुरक्षा नियमों और चुनौतियों का बढ़ता असर
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही कंपनियों के सामने सुरक्षा और सरकारी नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत की लगभग 61 प्रतिशत कंपनियों ने स्वीकार किया है कि डेटा सुरक्षा और नियमों की जटिलताओं के कारण उनके एआई प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ गई है। कई बार तो इन तकनीकी कार्यों को सुरक्षा कारणों से बीच में ही रोकना पड़ा है। एआई का जुड़ाव अब सीधे व्यावसायिक प्रणालियों और महत्वपूर्ण डेटा के साथ हो रहा है। इस स्थिति में कंपनियां अब डेटा गोपनीयता और सिस्टम के सही संचालन को लेकर काफी गंभीर हो गई हैं। एशिया प्रशांत और जापान क्षेत्र यानी एपीजेसी के करीब 72 प्रतिशत निर्णय लेने वाले लोगों का मानना है कि ठोस रणनीति के अभाव में वे किसी भी नए एआई प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं। सुरक्षा चिंताएं अब व्यापारिक विस्तार में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर की कमी
एआई की तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सिर्फ सॉफ्टवेयर का होना काफी नहीं है बल्कि मजबूत तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की भी बेहद जरूरत है। वर्तमान स्थिति यह है कि भारत की 67 प्रतिशत कंपनियों के पास अपने डेटा सेंटर इतने शक्तिशाली नहीं हैं कि वे एआई के भारी-भरकम काम को संभाल सकें। एआई अनुप्रयोगों के बढ़ते उपयोग के चलते बेहतर कंप्यूटिंग शक्ति और स्टोरेज क्षमता की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कंपनियों को अपने मौजूदा पुराने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से अपग्रेड करने की सख्त आवश्यकता महसूस हो रही है। नेटवर्किंग की बेहतर सुविधा के बिना बड़े पैमाने पर एआई संचालन करना संभव नहीं है। आने वाले समय में कंपनियों को न केवल सॉफ्टवेयर बल्कि फिजिकल हार्डवेयर और डेटा सेंटर के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश करने की चुनौती का सामना करना होगा। यह सुधार ही आने वाले समय में एआई के प्रभावी प्रदर्शन को संभव बनाएगा।