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नया विजन: टेक्नोलॉजी में सिर्फ यूजर नहीं बल्कि रूल मेकर बने भारत, 'आइडियाज मैटर मोस्ट' टॉक शो का आयोजन
डिजिटल युग में भारत की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया गया है। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के साथ मिलकर 'आइडियाज मैटर मोस्ट' ने एक विशेष टॉक शो आयोजित किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि देश को अब केवल तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय इसके नियम और दिशा तय करने वाली ताकत बनना चाहिए।
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Ankit Yadav
06 सित 2026, 17:29
आज के इस दौर में तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 'आइडियाज मैटर मोस्ट' की तरफ से दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के सहयोग से एक भव्य टॉक शो संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के तकनीकी भविष्य और वैश्विक मंच पर इसकी मजबूत उपस्थिति को लेकर मंथन करना था। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि किस प्रकार भारत दुनिया भर में तकनीकी उत्पादों और सेवाओं के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम केवल उपभोक्ता की भूमिका से आगे बढ़कर वैश्विक मानकों और नियमों को निर्धारित करने वाले 'रूल मेकर' की भूमिका निभाएं।
तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नए आयाम
कार्यक्रम के दौरान देश के युवाओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी दिग्गजों को एक मंच पर लाकर नए विचारों पर चर्चा की गई। चर्चा में इस बात पर सहमति जताई गई कि जब तक देश अपने खुद के मौलिक विचार और तकनीक विकसित नहीं करेगा, तब तक वैश्विक पटल पर नेतृत्व करना कठिन होगा। डिजिटल क्रांति के इस युग में भारत के पास असीम संभावनाएं हैं। हमारे पास युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है जो अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं। इस टॉक शो के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सुरक्षा और अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भारत को अपनी मजबूत नींव रखनी होगी ताकि दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने के बजाय हम खुद अपने नियम तय कर सकें।
विचारों की ताकत और भविष्य की राह
'आइडियाज मैटर मोस्ट' के इस मंच पर वक्ताओं ने साझा किया कि बेहतरीन विचार ही किसी भी राष्ट्र की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के साथ मिलकर आयोजित इस संवाद सत्र में उद्योग जगत के कई जाने-माने विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। जब छोटे शहरों और कस्बों से युवा अपने नए आइडिया लेकर आगे आएंगे, तभी देश एक सच्चा तकनीकी महाशक्ति बन पाएगा। इस प्रकार के आयोजन न केवल वैचारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं बल्कि नई पीढ़ी को एक सही दिशा दिखाने का भी कार्य करते हैं।
व्यापक प्रभाव और आगे की योजनाएं
इस सफल आयोजन के बाद से ही तकनीकी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि भारत को वास्तव में अपनी नीतियों और रणनीतियों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक सिरमौर राष्ट्र के रूप में स्थापित होना है, तो उसे अनुसंधान और विकास यानी आरएंडडी पर भारी निवेश करना होगा। केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं पर निर्भर रहने के बजाय हार्डवेयर निर्माण और कोर टेक्नोलॉजी में भी महारत हासिल करनी होगी। इस टॉक शो ने देश के नीति निर्माताओं, उद्यमियों और युवाओं के सामने एक स्पष्ट रोडमैप रख दिया है, जिससे आने वाले दिनों में देश की डिजिटल और तकनीकी नीति को एक नई दिशा मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।