कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      "ट्रंप के बयान बेतुके और अस्वीकार्य": मैक्रों ने फ्रांस में दंगों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर किया पलटवार      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
टेक्नोलॉजी

पर्यावरण और बचत: प्लास्टिक बोतलों से मकान बनाने की जर्मन तकनीक से बचेगी आधी ईंट और सीमेंट

भविष्य के निर्माण क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक जर्मन बिल्डर ने ऐसी अभिनव तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग करके मकान तैयार किए जाएंगे। इस पद्धति से निर्माण कार्य में पचास प्रतिशत तक सीमेंट और ईंटों की बचत होना संभव हो गया है।

A
Ankit Yadav
16 सित 2026, 14:01
पर्यावरण और बचत: प्लास्टिक बोतलों से मकान बनाने की जर्मन तकनीक से बचेगी आधी ईंट और सीमेंट
आधुनिक निर्माण जगत में संसाधनों के बेहतर और टिकाऊ इस्तेमाल को लेकर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जर्मनी के एक बिल्डर द्वारा खोजी गई नवीनतम तकनीक ने पर्यावरणविदों और इंजीनियरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। पारंपरिक निर्माण पद्धतियों में भारी मात्रा में ईंटों और सीमेंट का उपयोग होता है, जिससे न केवल लागत बढ़ती है बल्कि पर्यावरण पर भी भारी दबाव पड़ता है। इस नई विधि के आने से निर्माण कार्यों में आने वाली इस लागत और पर्यावरणीय क्षति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

कचरे का सदुपयोग और घटती लागत

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या आज पूरी दुनिया के लिए एक विकराल रूप लेती जा रही है। प्लास्टिक कचरा इसमें सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है, जिसका सही निपटान करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जर्मन बिल्डर की यह अनोखी तकनीक इसी प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने का काम करती है। प्लास्टिक की बोतलों को घरों की दीवारों और अन्य ढांचों के निर्माण में मुख्य घटक के रूप में इस्तेमाल करके, निर्माण कंपनियां पारंपरिक कच्चे माल पर अपनी निर्भरता को आधा कर सकती हैं। इससे निर्माण क्षेत्र में कुल खर्च में भी भारी कमी आएगी और आम आदमी के लिए घर बनाना थोड़ा सुलभ हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की टिकाऊ तकनीकों का विस्तार भारत जैसे विकासशील देशों में भी तेजी से होना चाहिए, जहां आवास की मांग लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश और लखनऊ जैसे तेजी से शहरीकरण का सामना कर रहे क्षेत्रों में यदि इस तरह की पर्यावरण-अनुकूल निर्माण प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाए, तो यह कचरा प्रबंधन और किफायती आवास दोनों मोर्चों पर एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। पारंपरिक ईंट-भट्ठों से होने वाले वायु प्रदूषण और उपजाऊ मिट्टी के नुकसान को रोकने में भी यह तकनीक बेहद मददगार साबित हो सकती है। भविष्य की निर्माण योजनाओं में इस तकनीक के व्यापक प्रभावों का आकलन करने के लिए विभिन्न देशों के इंजीनियर और बिल्डर शोध कर रहे हैं। आने वाले समय में अगर इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलती है और इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाता है, तो यह कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर बदलकर रख देगा। उम्मीद की जा रही है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन रुकेगा और कचरे का एक स्थाई समाधान निकलेगा।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज