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टेक्नोलॉजी

फर्जी कॉल्स पर रोक: 1 नवंबर से फोन स्क्रीन पर दिखेगा कॉलर का असली नाम

केंद्र सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने स्पैम और धोखाधड़ी वाली फोन कॉल पर नियंत्रण के लिए बड़ा निर्णय लिया है। आगामी 1 नवंबर, 2026 से पूरे भारत में कॉलर नेम डिस्प्ले सेवा को अनिवार्य लागू किया जा रहा है।

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Ankit Yadav
17 अक्ट 2026, 14:22
फर्जी कॉल्स पर रोक: 1 नवंबर से फोन स्क्रीन पर दिखेगा कॉलर का असली नाम

कॉलर का असली नाम पहचानना हुआ आसान

देश में आम नागरिकों को ठगी से बचाने के उद्देश्य से सरकार ने कॉलिंग नेम आइडेंटिटी सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में फर्जी और स्पैम कॉल के कारण आम आदमी अक्सर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है। अब 1 नवंबर, 2026 से जब भी किसी अज्ञात नंबर से फोन आएगा, तो मोबाइल स्क्रीन पर उस व्यक्ति या संबंधित संस्था का वास्तविक नाम स्वतः ही दिखाई देने लगेगा। यह तकनीक विशेष रूप से 4जी और 5जी जैसे आधुनिक बेतार संचार नेटवर्क पर लागू होगी। अब तक लोग मोबाइल स्क्रीन पर कॉलर का नाम जानने हेतु थर्ड-पार्टी आधारित एप्स पर निर्भर थे, जो क्राउड-सोर्स्ड डाटा के चलते कई बार गलत जानकारी प्रदान करते थे। अब टेलीकॉम ऑपरेटर अपने आधिकारिक केवाईसी रिकॉर्ड्स से डाटा उठाकर नाम प्रदर्शित करेंगे, जिससे कॉलर की पहचान की पुष्टि करना बेहद सरल और विश्वसनीय हो गया है।

व्यावसायिक कॉल्स और तकनीकी प्रावधान

टेलीकॉम कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कॉल समाप्त होते ही कॉलिंग नेम आइडेंटिटी का डाटा सर्वर से तुरंत डिलीट हो जाए। व्यावसायिक और बल्क कनेक्शन का उपयोग करने वाली संस्थाओं के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे संस्थान अपने आधिकारिक नाम के स्थान पर ट्रेडमार्क रजिस्ट्री या जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत व्यावसायिक नाम दिखा सकते हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर इन नामों को अपडेट करने से पहले संबंधित दस्तावेजों की पूरी जांच और सत्यापन करेंगे। कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर दो फील्ड्स दिखाई देंगे, जिसमें पहला टेलीफोन नंबर और दूसरा कॉलर का नाम होगा। यदि कोई नंबर पहले से ही फोन की कांटेक्ट लिस्ट में सहेजा गया है, तो उपयोगकर्ता द्वारा सेव किया गया नाम ही प्रदर्शित होगा। अंतरराष्ट्रीय कॉल आने की स्थिति में स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से इंटरनेशनल कॉल लिखा हुआ दिखेगा, ताकि उपयोगकर्ता सतर्क रह सके।

शिकायत निवारण और सेवा की सीमाएं

इस नई व्यवस्था के तहत टेलीकॉम कंपनियों को एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा ताकि समस्याओं का समाधान तय समय सीमा के भीतर किया जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी ग्राहक ने नियमों के मुताबिक कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन जैसी सुविधा ले रखी है, तो उनका नाम स्क्रीन पर नहीं दर्शाया जाएगा। यह कदम मुख्य रूप से उन फर्जी फोन कॉल पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है, जो सस्ते लोन का लालच देते हैं, लॉटरी का झूठा दावा करते हैं या फिर बैंक अधिकारी का स्वांग रचकर आम जनता की मेहनत की कमाई को हड़पने की कोशिश करते हैं। भविष्य में इस तकनीक से फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों पर लगाम लगने की संभावना है और टेलीकॉम ऑपरेटरों को इस पूरे तंत्र को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना होगा।

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