'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर
'इतना अन्याय किसी परिवार के ऊपर नहीं हुआ होगा...', अखिलेश यादव ने आजम खान के लिए ऐसा क्यों कहा?
अनशन खत्म कराने डिप्टी CM ने लिए थे 500 करोड़? एकनाथ शिंदे vs मनोज जरांगे के बीच अब क्या पंगा
स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...
गूगल के CEO सुंदर पिचाई से बोले ट्रंप- अभी अटलांटिक का नाम बदलो, फिर मैं प्रशांत
यूं ही नहीं फ्रांस से भारत तक हो रहे दंगे-प्रदर्शन, 13 देशों के 101 संगठनों का सीक्रेट नेटवर्क कर रहा काम
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...
ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: स्टार्टअप्स को लैब से बाजार तक पहुंचना चाहिए, डॉ. जितेंद्र सिंह का बयान
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि देश के स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकलकर तकनीक को सीधे बाजार तक पहुंचाने का मजबूत माध्यम बनना चाहिए।
A
Ankit Yadav
07 सित 2026, 12:21
देश के विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के सिलसिले में एक ताजा बयान सामने आया है जिसमें युवा उद्यमों और नवोन्मेषकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि हमारे देश के स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक शोध और प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाली आधुनिक तकनीकों को आम जनता और व्यावसायिक बाजारों तक सफलतापूर्वक पहुंचाने का एक अहम जरिया बनना चाहिए। इससे न केवल अनुसंधान और विकास को सही दिशा मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी एक नया आयाम प्राप्त होगा। आज के दौर में जब भारत तकनीकी क्षेत्र में लगातार नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है, तब यह आवश्यक हो गया है कि वैज्ञानिक खोजें केवल कागजों या लैब तक सीमित न रहें।
लैब से बाजार तक का सफर
शोध और उद्योग के बीच की दूरी को पाटने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और ऐसे में स्टार्टअप इकोसिस्टम की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। जब वैज्ञानिक नवाचार सीधे बाजार की जरूरतों के साथ जुड़ते हैं, तो उनका व्यावसायिक उपयोग संभव हो पाता है और उससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में युवा उद्यमी अब नए विचारों के साथ आगे आ रहे हैं, जिन्हें इस तरह के नीतिगत मार्गदर्शन से और अधिक बल मिलने की उम्मीद है। लखनऊ जैसे उभरते हुए टियर-2 और टियर-3 शहरों में इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप हब तेजी से विकसित हो रहे हैं, जो जमीनी स्तर पर तकनीकी बदलाव लाने का काम कर रहे हैं।
पारंपरिक उद्योगों और आधुनिक तकनीकों के बीच समन्वय स्थापित करने से देश में एक मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार हो सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश के युवा उद्यमियों को अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी हस्तांतरण की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका लाभ उठाकर भारत को वैश्विक पटल पर एक प्रमुख उत्पादक देश के रूप में स्थापित किया जा सकता है। सरकार का यह विजन देश के दूरदराज के इलाकों तक वैज्ञानिक लाभ पहुंचाने पर केंद्रित है।
भविष्य की दिशा और संभावनाएं
आने वाले दिनों में इस तरह की पहलों से न केवल देश के भीतर तकनीकी स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी भारतीय स्टार्टअप्स पर और अधिक मजबूत होगा। जब प्रयोगशालाओं की खोजें बाजार की मांग के अनुसार ढाली जाएंगी, तो उपभोक्ता उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और कम लागत में बेहतर समाधान उपलब्ध हो सकेंगे। नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि इस दिशा में निरंतर प्रयास करने से भारत दुनिया का सबसे बड़ा और गतिशील स्टार्टअप हब बनने की अपनी यात्रा को तेजी से पूरा कर सकेगा। लखनऊ और अन्य उत्तर भारतीय शहरों के युवा प्रोफेशनल्स भी इस बदलाव का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।