सर्वर में तकनीकी खराबी से बाधित हुआ कामकाज
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को एचएमआईएस सर्वर की तकनीकी गड़बड़ी के कारण अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई। सुबह के समय से ही शहर, ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य बिहार के सीमावर्ती इलाकों से करीब चार हजार लोग इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। नए भवन और एमसीएच विंग के पंजीयन काउंटरों पर सुबह से ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। दोपहर के वक्त अचानक करीब 12.15 बजे कंप्यूटर प्रणाली का सर्वर डाउन हो गया, जिससे पर्ची और बिलिंग का काम पूरी तरह रुक गया। काउंटर पर खड़े लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। सुरक्षा कर्मियों और अस्पताल के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। करीब 12.48 बजे जब सर्वर ठीक हुआ तो सभी ने राहत की सांस ली, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। इसके थोड़ी ही देर बाद दोपहर 1.47 बजे एक बार फिर सर्वर में तकनीकी खामी आ गई, जिससे कामकाज दोबारा बाधित हो गया। बिलिंग काउंटर पर खड़े लोग इस बार फिर से नाराज हो गए और उन्हें दोबारा शांत कराना पड़ा। आखिरकार दोपहर 2.25 बजे सर्वर चालू होने के बाद ही सभी काउंटर सुचारू रूप से चल पाए, लेकिन इस व्यवधान से लोगों को बहुत अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा और खासी परेशानी उठानी पड़ी।
विभिन्न विभागों में उमड़ी भारी भीड़ और मरीजों का उपचार
आर्थो यानी अस्थि रोग विभाग में सबसे अधिक भीड़ रही, जहां छह सौ से अधिक मरीजों का उपचार किया गया जिनमें मुख्य रूप से नस, जोड़ों के दर्द, सर्वाइकल और हड्डियों की समस्याओं से पीड़ित लोग शामिल थे। मेडिसिन विभाग में भी लंबी लाइनें लगी रहीं और यहां चार सौ पचपन से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ, जिन्हें बुखार, सर्दी, जुकाम, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, ब्लड प्रेशर और शुगर की शिकायत थी। स्किन यानी त्वचा रोग विभाग में साढ़े तीन सौ से अधिक लोगों का उपचार किया गया जो दाद, खुजली, फुंसी और चकत्तों से परेशान थे। नेत्र रोग विभाग में ढाई सौ से अधिक मरीजों की जांच की गई जिनमें आंख से पानी आने, खुजली, लालालपन, चुभन, दर्द और मोतियाबिंद के मामले प्रमुख थे। ईएनटी यानी कान, नाक और गले के विभाग में दो सौ दो से अधिक मरीजों का इलाज हुआ जो कान में खुजली, दर्द, मवाद आने और कम सुनाई देने से पीड़ित थे। बाल रोग विभाग में छोटे बच्चों को लेकर परिजन पहुंचे थे और दो सौ तीस से अधिक बच्चों का इलाज किया गया जिन्हें बुखार, खांसी, पेट दर्द, सांस और दस्त की दिक्कत थी। इनमें से पंद्रह गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी किया गया। सर्जरी विभाग में लगभग एक सौ नब्बे मरीजों का उपचार हुआ जो सिर की चोट, पथरी, हर्निया और अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे। पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में सांस, खांसी, एलर्जी और अस्थमा के एक सौ अस्सी से अधिक मरीज पहुंचे थे। इसके अलावा फीवर क्लीनिक में एक सौ दस और मानसिक रोग विभाग में एक सौ तेईस मरीजों का इलाज किया गया, जबकि दंत रोग विभाग में तिरानवे मरीज पहुंचे थे। इन सभी स्थानों पर डॉक्टर के कमरे में पहले जाने को लेकर लोगों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
डिजिटल एक्स-रे सेंटर पर लंबी कतार और वापसी
मेडिकल कॉलेज के डिजिटल एक्स-रे सेंटर पर भी सुबह से ही मरीजों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और समय के साथ यह कतार काफी लंबी हो गई। इस सेंटर पर कुल एक सौ पचानवे मरीजों की जांच की गई, लेकिन इसके लिए लोगों को अपनी बारी के वास्ते बहुत देर तक इंतजार करना पड़ा। लंबी कतारों और भारी भीड़ को देखकर करीब पंद्रह मरीज बिना अपनी जांच कराए ही वापस अपने घर लौट जाने को मजबूर हो गए। अस्पताल में आई इस व्यवस्थागत अव्यवस्था और सर्वर की खराबी के कारण दिनभर अफरातफरी का माहौल बना रहा। दूर-दराज से आए मरीजों और उनके तीमारदारों को न केवल पंजीकरण के समय बल्कि दवा लेने और जांच कराने के दौरान भी भारी प्रतीक्षा करनी पड़ी। सर्वर बाधित होने की दो अलग-अलग घटनाओं ने अस्पताल की डिजिटल व्यवस्था की पोल खोल दी, हालांकि बाद में तकनीकी टीम ने इसे दुरुस्त कर लिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा लगातार मरीजों को समझाए जाने के बावजूद दिनभर व्यवस्था पटरी पर लौटने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस तरह की तकनीकी बाधाओं से भविष्य में बचने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि आने वाले दिनों में मरीजों को इस तरह की भारी असुविधा का सामना न करना पड़े।