सेमीकंडक्टर चिप्स की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने के लिए सुनियोजित कदम उठा रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2035 तक देश में 120 से 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन निर्मित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार केवल छोटे चिप्स बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुसार मॅच्योर-नोड चिप्स, एनालॉग और मिक्स्ड-सिग्नल चिप्स के साथ सिलिकॉन कार्बाइड और गैलियम नाइट्राइड जैसे कंपाउंड सेमीकंडक्टर विकसित करने पर जोर दे रही है। इन चिप्स का उपयोग ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक कार्यों और दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत का इरादा ओएसएटी यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग के साथ एडवांस्ड पैकेजिंग में दुनिया के तीन प्रमुख केंद्रों में शामिल होने का है। अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा का उपयोग करके देश चिप डिजाइन और सिस्टम आर्किटेक्चर के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है। सरकार द्वारा जुलाई महीने में मंजूर की गई 1,27,500 करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2 योजना इस दिशा में एक बड़ा कदम है जो आपूर्ति श्रृंखला को नई मजबूती प्रदान करेगी।
इंडिया एआई मिशन की कार्ययोजना और निवेश
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने मार्च 2024 में इंडिया एआई मिशन को औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए पांच साल की अवधि में 10,300 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश में एआई शोध, स्टार्टअप्स और कुशल मानव संसाधन का एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। मिशन के तहत भारत एआई कंप्यूट क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से 10,000 से अधिक जीपीयू की कंप्यूटिंग शक्ति विकसित की जाएगी। यह सुविधा देश के शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को महंगे संसाधनों तक आसानी से पहुंच प्रदान करेगी। साथ ही, एआई स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग और भारतीय डाटा सेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी काम हो रहा है। फ्यूचरस्किल्स कार्यक्रम के जरिए छोटे शहरों और विश्वविद्यालयों में एआई और डाटा शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।
रणनीतिक महत्व और तकनीकी विकास
देश में चिप डिजाइन के लिए कई नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी गई है, जो सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को गति देंगे। कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन टूल्स ऑटोमेशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकें। सेमीकंडक्टर और एआई में यह दोहरी रणनीति भारत को केवल एक उपभोक्ता के बजाय एक उत्पादक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। इन तकनीकों का प्रभाव हमारे औद्योगिक विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ेगा। रेयर अर्थ मिनरल्स और चिप्स की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूप से अनिवार्य है। छोटे शहरों तक एआई शिक्षा पहुँचाने से तकनीकी विकास का लाभ पूरे देश को मिल सकेगा। सरकार द्वारा उठाए जा रहे ये कदम न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेंगे बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की एक अलग और विश्वसनीय पहचान भी बनाएंगे। आने वाले वर्षों में इन मिशनों का सफल क्रियान्वयन भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का आधार बनेगा, जिससे देश तकनीकी नवाचार के नए केंद्र के रूप में उभरेगा।