रैम से जुड़े भ्रम और मोबाइल की वास्तविक परफॉर्मेंस
नया मोबाइल खरीदते समय खरीदार सबसे पहले रैम का ही चुनाव करते हैं। बाजार में 8GB, 12GB या 16GB रैम वाले हैंडसेट देखकर लोगों को यह गलतफहमी हो जाती है कि उनका डिवाइस कभी हैंग नहीं होगा। खरीदार यह मान लेते हैं कि बड़ी रैम होने पर एप्स तेजी से चलेंगे और किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा हमेशा नहीं होता है और कई बार अधिक रैम क्षमता वाले स्मार्टफोन भी अचानक धीमे हो जाते हैं। इसके चलते यूजर के मन में यह सवाल पैदा होता है कि आखिर भारी रैम के बावजूद डिवाइस की कार्यक्षमता क्यों गिर जाती है। जब उपकरण में इस तरह की दिक्कतें सामने आती हैं, तो यूजर को समझ नहीं आता कि उसने इतनी महंगी रैम वाला फोन क्यों खरीदा था। ऐसे में सिर्फ रैम के आंकड़ों पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही रणनीति नहीं साबित होती है। बेहतर मोबाइल अनुभव के लिए रैम के अलावा दूसरे तकनीकी पहलुओं पर भी गौर करना बेहद आवश्यक होता है।
बैकग्राउंड में चलने वाले एप्स और स्टोरेज का असर
स्मार्टफोन के धीमे होने के पीछे उसकी इंटरनल स्टोरेज का लगभग भरा होना एक मुख्य कारण होता है। मोबाइल सिस्टम को अपनी टेम्पररी फाइल्स, एप डेटा और कैश को सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज में कुछ खाली जगह की आवश्यकता होती है। यदि स्टोरेज में बहुत कम स्पेस शेष बचता है, तो सिस्टम के लिए इन जरूरी फाइलों को संभालना काफी कठिन हो जाता है। इसी वजह से एप्स को खुलने में अधिक समय लगने लगता है और इस्तेमाल के दौरान फोन बार-बार अटकने लगता है। इसके अलावा बैकग्राउंड में लगातार सक्रिय रहने वाले एप्स भी फोन की रफ्तार पर बुरा असर डालते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड बैकअप और लोकेशन जैसी सर्विस बिना रुके फोन के हार्डवेयर रिसोर्स का इस्तेमाल करती रहती हैं। इन सभी सेवाओं के एक साथ चालू रहने से रैम और प्रोसेसर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। पर्याप्त रैम होने के बावजूद यदि ये तमाम बैकग्राउंड सेवाएं लगातार एक्टिव रहती हैं, तो मोबाइल की परफॉर्मेंस निश्चित रूप से प्रभावित होती है।
बेहतर स्मार्टफोन परफॉर्मेंस के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
इन तमाम उपायों को आजमाने के बाद भी यदि आपका मोबाइल लगातार हैंग हो रहा है, तो समस्या का दायरा सिर्फ रैम तक सीमित नहीं है। इस स्थिति में यह स्पष्ट हो जाता है कि गड़बड़ी स्टोरेज, मुख्य प्रोसेसर, सॉफ्टवेयर या फिर हार्डवेयर में से किसी एक स्तर पर है। यानी सिर्फ रैम की संख्या देखकर मोबाइल खरीदने का फैसला करना पूरी तरह से गलत साबित हो सकता है। स्मार्टफोन से बेहतरीन परफॉर्मेंस हासिल करने के लिए आपको रैम के साथ-साथ उसके प्रोसेसर की ताकत पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा इंटरनल स्टोरेज की क्षमता, सॉफ्टवेयर का सही ऑप्टिमाइजेशन और बैकग्राउंड में चलने वाली सेवाओं का नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। जब आप इन सभी तकनीकी बिंदुओं को एक साथ ध्यान में रखकर किसी उपकरण का चयन करते हैं, तभी आपको एक संतोषजनक और तेज मोबाइल अनुभव प्राप्त हो सकता है।