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टेक्नोलॉजी

सुरक्षा की नई पहल: आईआईटी बीएचयू ने कोयला खदानों के लिए विकसित की ब्लास्ट फ्री तकनीक

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी बीएचयू) ने कोयला खदानों में होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीक का विकास किया है, जिससे खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 14:12
सुरक्षा की नई पहल: आईआईटी बीएचयू ने कोयला खदानों के लिए विकसित की ब्लास्ट फ्री तकनीक
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी बीएचयू) के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने खनन उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसी तकनीक तैयार की है जिससे कोयला खदानों में ब्लास्टिंग की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। पारंपरिक तौर पर कोयला निकालने की प्रक्रिया में विस्फोटकों का भारी इस्तेमाल होता है जिसके कारण अक्सर खतरनाक दुर्घटनाएं होती हैं और बहुमूल्य जानें तथा संपत्ति का नुकसान होता है। इस नई विधि के आने से देश भर की खदानों में सुरक्षा का स्तर पूरी तरह से बदल जाएगा और श्रमिकों के लिए काम करना अधिक सुरक्षित हो जाएगा।

खनन क्षेत्र में सुरक्षा क्रांति

उद्योग जानकारों का मानना है कि खनन क्षेत्र में सुरक्षा हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। गहरे भूमिगत क्षेत्रों में विस्फोटकों का प्रयोग करने से न केवल गैस रिसाव और चट्टान धंसने का खतरा रहता है, बल्कि आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आईआईटी बीएचयू द्वारा खोजी गई यह अभिनव तकनीक बिना किसी विस्फोटक विस्फोट के कोयला निकालने की क्षमता रखती है। यह अनुसंधान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के भीतर ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ खनिकों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने इस प्रणाली को तैयार करने में आधुनिक इंजीनियरिंग सिद्धांतों का उपयोग किया है जो बिना कंपन के खदान के पत्थरों और कोयले को तोड़ने में सक्षम है। भविष्य की संभावनाओं की बात करें तो इस प्रणाली के व्यापक पैमाने पर लागू होने से भारत के खनन उद्योग में एक नई क्रांति आने की पूरी संभावना है। इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग और खदानों में इसके परीक्षण को लेकर विभिन्न सरकारी और निजी खनन कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। आने वाले दिनों में इसे कोल इंडिया और अन्य प्रमुख खनन क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है, जिससे दुर्घटनाओं के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, पर्यावरणविदों ने भी इस पर्यावरण-अनुकूल पहल का स्वागत किया है क्योंकि इससे ब्लास्टिंग के कारण होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा इस तरह के व्यावहारिक अनुसंधान समाज और उद्योग जगत की समस्याओं का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी बीएचयू की इस उपलब्धि से न केवल खनन श्रमिकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि देश के औद्योगिक विकास में भी एक नया और सुरक्षित अध्याय जुड़ेगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में इस तकनीक के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़े और भी अधिक आंकड़े और दिशानिर्देश सामने आएंगे, जो इसे बड़े पैमाने पर अपनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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