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विशाल परिवहन: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आया 308 पहियों वाला ट्रक, देखने उमड़ी भारी भीड़

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बेल्जियम से समुद्री रास्ते आया 308 पहियों वाला एक विशाल मल्टी एक्सल हाइड्रोलिक ट्रक पहुंचा है। यह भारी वाहन 200 टन से अधिक वजन और 100 फीट लंबा बॉयलर लेकर बलरामपुर चीनी मिल के एथेनॉल प्लांट की ओर बढ़ रहा है।

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Ankit Yadav
10 अक्ट 2026, 14:46
विशाल परिवहन: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आया 308 पहियों वाला ट्रक, देखने उमड़ी भारी भीड़

गोरखपुर में पहुंचा 308 पहियों का वाहन

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक अत्यंत विशालकाय और भारी भरकम वाहन का आगमन हुआ है जिसमें कुल 308 पहिए लगाए गए हैं। यह वाहन कोई आम गाड़ी नहीं बल्कि एक विशेष मल्टी एक्सल हाइड्रोलिक ट्रक है जिसे विदेशों से मंगवाया गया है। यह भारी वाहन बेल्जियम देश से समुद्री मार्ग के माध्यम से भारत की धरती पर उतरा है। इसके बाद इसे ओडिशा राज्य से सड़क मार्ग के जरिए आगे बढ़ाया गया है। इस गाड़ी पर लगभग 100 फीट लंबा और 200 टन से भी अधिक वजन का भारी बॉयलर लादा गया है। इस विशालकाय मशीनरी को बलरामपुर चीनी मिल के अंतर्गत संचालित होने वाले एथेनॉल प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। इस भारी वाहन को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए तमाम मुश्किल रास्तों और तंग जगहों से होकर गुजरना पड़ रहा है। वाहन के इस प्रकार सड़क पर चलने की खबर फैलते ही स्थानीय नागरिकों में भारी उत्सुकता देखने को मिली है। लोग इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में सड़कों के किनारे और टोल प्लाजा के पास इकट्ठा हो गए। कई लोगों ने इस अनोखे और अभूतपूर्व ट्रक के साथ अपनी तस्वीरें और सेल्फी भी लीं। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में कभी इतना बड़ा ट्रक नहीं देखा था और यह उनके लिए एक नया अनुभव था।

टोल प्लाजा के पास सड़क का निर्माण कार्य

इस भारी भरकम ट्रक के आवागमन के दौरान कई प्रकार की तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं सामने आईं जिनका समाधान करना बेहद जरूरी था। गोरखपुर और वाराणसी के बीच स्थित हाईवे पर भीटहा टोल प्लाजा के निकट इस ट्रक को पार कराने में भारी कठिनाई महसूस की गई। ट्रक का आकार और वजन इतना अधिक था कि मौजूदा सड़क कम पड़ गई जिसके कारण प्रशासन और विशेषज्ञों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। स्थिति से निपटने के लिए टोल प्लाजा के ठीक किनारे एक नई एक लेन की सड़क का विशेष निर्माण कराया गया। ट्रक पर 200 टन से अधिक वजन का बॉयलर लदे होने की वजह से इस नई बनाई गई सड़क को काफी मजबूत और टिकाऊ बनाया गया ताकि वह भारी दबाव को सहन कर सके। इस मजबूत सड़क के बन जाने के बाद इस विशाल मल्टी एक्सल हाइड्रोलिक ट्रक को धीरे-धीरे और पूरी सावधानी के साथ उस पार निकाला गया। इस पूरी परिवहन प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञों की एक पूरी टीम वाहन के साथ चल रही है। इसके अलावा इस ट्रक के आगे दो पायलट वाहन भी चल रहे हैं जो आगे के रास्ते का जायजा ले रहे हैं। जिन स्थानों पर सड़क बहुत सकरी या पतली पाई जा रही है वहां पर सड़कों को चौड़ा करने का काम भी किया जा रहा है ताकि इस भारी वाहन को बिना किसी दुर्घटना के आसानी से गुजारा जा सके।

धीमी गति और आगे की परिवहन योजना

इस विशालकाय ट्रक पर 200 टन से भी ज्यादा वजन का बॉयलर लदा होने के कारण इसकी रफ्तार बहुत धीमी हो गई है। अत्यधिक वजन और वाहन के बड़े आकार के कारण यह ट्रक एक दिन में केवल 10 से 15 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पा रहा है। इस प्रकार की भारी ढुलाई में रास्ता तैयार करना अपने आप में एक बहुत बड़ी और कठिन चुनौती साबित हो रहा है। रास्ते के दौरान सड़कों के अलावा बिजली के तार फुट ओवर ब्रिज और अन्य कई प्रकार की बाधाएं सामने आ रही हैं। इन सभी बाधाओं को योजनाबद्ध तरीके से ठीक करके और रास्ता साफ करके ही इस ट्रक को आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान स्थान से यह ट्रक गोरखपुर और वाराणसी हाईवे से मुड़कर गोरखपुर और लखनऊ हाईवे की दिशा में आगे बढ़ेगा। इस नए मार्ग से होते हुए यह वाहन अंततः अपने अंतिम गंतव्य यानी बलरामपुर चीनी मिल के एथेनॉल प्लांट तक पहुंचेगा। परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के भारी वजन को इतने लंबे रास्ते से ले जाना तकनीकी रूप से बेहद जटिल कार्य है। इसके लिए हर कदम पर विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है ताकि संयंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे और रास्ते की बुनियादी संरचना भी सुरक्षित बनी रहे।

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