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भीषण तबाही: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ से 160 मौतें और भारी नुकसान
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही मची है, जिसमें अब तक 160 लोगों की जान जा चुकी है और कई बुनियादी ढांचे तबाह हो गए हैं।
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Ankit Yadav
27 अग 2026, 14:11
नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति का ऐसा भयंकर कहर बरपा है जिसने पूरे क्षेत्र में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश और उसके बाद उपजे बाढ़ के हालातों ने पर्वतीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। अधिकारियों से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक कुल 160 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। सीमा के दोनों तरफ बचाव दल लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक स्थिति और लगातार खराब मौसम के कारण राहत और बचाव अभियानों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
बुनियादी ढांचे को भारी क्षति
इस जलप्रलय ने केवल मानवीय जिंदगियों को ही नहीं लील, बल्कि क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर पानी के तेज बहाव और भूस्खलन की वजह से कुल 19 बड़े पुल पूरी तरह से बह गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे कई इलाकों का आपसी संपर्क कट गया है। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र को भी भारी झटका लगा है और लगभग 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स इस बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। बिजली उत्पादन ठप होने से प्रभावित क्षेत्रों में अंधेरा छा गया है और बिजली आपूर्ति बहाल करने में लंबा समय लग सकता है। स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन के साधन बुरी तरह चरमरा चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयों ने प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। बेघर हुए हजारों लोगों को सुरक्षित ठिकानों और राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां उन्हें भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय सरकारें और केंद्रीय एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अत्यधिक मौसमी घटनाएं जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं, जो पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हो रही हैं। हालात सामान्य होने में अभी काफी वक्त लग सकता है और पुनर्निर्माण कार्य एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।