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विदेश

वैश्विक कूटनीति: ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर एक साथ नजर आएंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग

आगामी ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर दिखाई देंगे, जिससे वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।

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Ankit Yadav
28 अग 2026, 15:45
वैश्विक कूटनीति: ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर एक साथ नजर आएंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस समय ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है। आने वाले इस महत्वपूर्ण आयोजन में दुनिया के कई बड़े नेता शिरकत करेंगे, लेकिन सबकी निगाहें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ मौजूदगी पर टिकी हुई हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक को भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे वक्त में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

नई विश्व व्यवस्था के संकेत

दुनिया भर के भू-राजनीतिक विश्लेषक इस महासम्मेलन को एक नए वैश्विक क्रम की तस्वीर के रूप में देख रहे हैं। पारंपरिक पश्चिमी आधिपत्य वाले अंतरराष्ट्रीय ढांचे के समानांतर उभरते हुए बहुध्रुवीय विश्व में ब्रिक्स देशों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में, भारत की मेजबानी या सहभागिता वाले इस मंच पर इन तीनों शीर्ष नेताओं का एक साथ आना वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा संदेश दे सकता है। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी इस बैठक के दूरगामी परिणाम होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वैश्विक मंचों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं के जरिए आपसी संबंधों को नई दिशा मिलती है। हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विभिन्न देशों के रुख में बदलाव आया है। ब्रिक्स समूह के भीतर आपसी व्यापार को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी लगातार चर्चा हो रही है। इस सम्मेलन के दौरान इन महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर ठोस सहमति बनने की उम्मीद की जा रही है, जो भविष्य के वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकती है। कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस आयोजन के दौरान वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज को और अधिक मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम किया जा सकता है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने आ रही मौजूदा चुनौतियों का समाधान ढूंढने के लिए इस प्रकार के मंच बेहद प्रभावी साबित होते हैं। भारत की सक्रिय भूमिका इसमें हमेशा से अहम रही है और इस बार भी दुनिया की निगाहें नई दिल्ली या संबंधित मंच पर होने वाली वार्ताओं के नतीजों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस सम्मेलन से जुड़ी और भी कई आधिकारिक जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। जैसे-जैसे आयोजन की तारीख नजदीक आ रही है, विभिन्न देशों के राजनयिक दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मंच से निकलने वाले संदेश वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के भविष्य को किस प्रकार आकार देते हैं।
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