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विदेश

कूटनीतिक पहल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरे पर एससीओ शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय मुद्दों पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श करेंगे।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 10:53
कूटनीतिक पहल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरे पर एससीओ शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय मुद्दों पर होगी चर्चा
भारतीय कूटनीति के मोर्चे पर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य एशियाई देशों के अहम दौरे पर रवाना होने वाले हैं। इस यात्रा के दौरान उनका मुख्य एजेंडा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक समृद्धि पर वैश्विक नेताओं के साथ मंथन करना होगा। मध्य एशिया के इन देशों के साथ भारत के सामरिक और ऐतिहासिक संबंध हमेशा से प्रगाढ़ रहे हैं, और इस यात्रा से इन रिश्तों को एक नई मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

व्यापार और रक्षा मुद्दों पर विशेष फोकस

प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान केवल बहुपक्षीय मंचों पर ही चर्चा सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों मेजबान देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का भी विशेष आयोजन किया गया है। इन वार्ताओं में मुख्य रूप से आपसी व्यापार को बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और रक्षा सहयोग को और अधिक गहरा करने जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से बातचीत होने की संभावना है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल के इस दौर में मध्य एशियाई देशों के साथ भारत का जुड़ना क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से बेहद प्रासंगिक माना जा रहा है। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दोनों ही देश मध्य एशिया में भारत के प्रमुख रणनीतिक साझीदार हैं। आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई, संपर्क (कनेक्टिविटी) परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी इस यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण सहमति बनने के आसार हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के उच्च-स्तरीय दौरों से न केवल कूटनीतिक संवाद में तेजी आती है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों पक्षों की व्यावसायिक इकाइयों को नए अवसर प्राप्त होते हैं। क्षेत्रीय कूटनीति के जानकारों का कहना है कि एससीओ शिखर सम्मेलन दुनिया के इस हिस्से में बदलती हुई राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच भारत के लिए अपनी बात मजबूती से रखने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी को और अधिक स्पष्ट रूप से रेखांकित करना चाहता है, ताकि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना किया जा सके। दौरे के अंतिम चरणों में विभिन्न समझौतों और ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाने की भी संभावना है, जो आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग की रूपरेखा तय करेंगे। भारतीय कूटनीतिक गलियारों में इस यात्रा को लेकर अभी से ही काफी उत्साह देखा जा रहा है और इसे भारत की विदेश नीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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