आलू के दाम में भारी गिरावट और किसानों की चिंता
उत्तर प्रदेश के आगरा क्षेत्र के किसानों के सामने इस समय अपनी फसल बेचने को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा समय में बड़े आकार का आलू बाजार में पांच सौ से लेकर आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। इसके अलावा गुल्ला और किर्री जैसी छोटी किस्मों की उपज को बेचने के बाद किसानों के लिए भंडारण गृह यानी कोल्ड स्टोर का किराया चुकाना भी लगभग असंभव हो रहा है। आमदनी इतनी कम हो गई है कि किसानों को अपनी लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों के मुकाबले इस सीजन में हालात बेहद चिंताजनक बन चुके हैं। किसानों का कहना है कि इस बार फसल की स्थिति बहुत ज्यादा खराब है और बाजार में उन्हें अपनी मेहनत का सही सिला नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से वे आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं और भविष्य को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।
सरकारी बीजों की भारी कीमत और किसानों का दर्द
कमजोर बाजार भाव के बीच दूसरी तरफ सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए जा रहे नए बीजों के दाम बहुत ज्यादा अधिक हैं। सरकारी बीज की कीमत दो हजार नौ सौ अस्सी रुपये से लेकर तीन हजार छह सौ तीस रुपये प्रति क्विंटल तक तय की गई है। जिस उपज को बेचकर किसान अपनी अगली फसल की बुवाई की तैयारी करना चाहते हैं, उसकी तुलना में नया बीज कई गुना अधिक महंगा मिल रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से किसानों को प्रति क्विंटल एक हजार रुपये का अनुदान भी दिया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों को खेती के लिए नया बीज खरीदने वास्ते बहुत बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ रहा है। खंदौली क्षेत्र के रहने वाले किसान संजीव कुमार का कहना है कि बाजार के मौजूदा भाव को देखते हुए इतना महंगा बीज खरीदना सीधे तौर पर घाटे का सौदा साबित हो रहा है। उनका यह भी मानना है कि सरकार को बाजार की मौजूदा वास्तविक स्थिति के आधार पर ही नए बीज के दाम तय करने चाहिए ताकि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
बुकिंग में आई बड़ी गिरावट और भविष्य की राह
महंगे बीज और कम कीमतों के इस विरोधाभास के चलते किसानों ने सरकारी बीज की बुकिंग से दूरी बनानी शुरू कर दी है। स्थिति यह है कि इस बार बीजों की एडवांस बुकिंग में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और अभी तक केवल एक सौ पचहत्तर बुकिंग ही सामने आई हैं। बमान गांव के निवासी किसान जितेंद्र कुमार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि पिछले तमाम वर्षों की तुलना में इस बार आलू उत्पादकों की हालत सबसे ज्यादा दयनीय हो गई है। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक फसल के बाजार भाव और बीज की कीमतों के बीच का अंतर कम नहीं किया जाएगा, तब तक कृषि कार्य करना मुश्किल रहेगा। किसान अब सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें बीज खरीद पर और अधिक छूट प्रदान की जाए ताकि वे किसी तरह अपना गुजारा चला सकें और अगली फसल के लिए जमीन तैयार कर सकें। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में निराशा का माहौल है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या नए कदम उठाती है।