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बाजार में उथल-पुथल: विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से इस महीने निकाले 14,475 करोड़ रुपए

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी जारी है। इस महीने अब तक निवेशकों ने बाजार से 14,475 करोड़ रुपए निकाल लिए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर और घरेलू अर्थव्यवस्था में बड़ी चर्चा छिड़ गई है।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 16:33
बाजार में उथल-पुथल: विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से इस महीने निकाले 14,475 करोड़ रुपए
भारतीय शेयर बाजार में इस समय विदेशी निवेशकों (FII) का रुख काफी सतर्क नजर आ रहा है। सितंबर के शुरुआती हफ्तों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजारों से भारी मात्रा में पूंजी वापस खींच ली है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने अब तक कुल 14,475 करोड़ रुपए की भारी-भरकम निकासी दर्ज की गई है। इस बड़ी बिकवाली ने बाजार के जानकारों और खुदरा निवेशकों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इससे घरेलू सूचकांकों पर दबाव साफ तौर पर देखा जा सकता है।

बॉन्ड यील्ड और वैश्विक कारकों का असर

वैश्विक वित्तीय बाजारों में हो रहे लगातार बदलाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने निवेशकों का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। अमेरिका और अन्य प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ने की वजह से विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं। जब ग्लोबल मार्केट में सुरक्षित रिटर्न आसानी से मिलने लगता है, तो उभरते बाजारों जैसे कि भारत से पूंजी बाहर जाने लगती है। यही वजह है कि पिछले कुछ सत्रों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली का दबाव बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार का मूल्यांकन काफी ऊंचा बना हुआ था, जिसके चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों की इस निकासी से भारतीय रुपए की चाल पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी बाजार को एक मजबूत सहारा दे रही है, वरना गिरावट का यह दौर और भी ज्यादा गहरा हो सकता था।

आगे की बाजार की चाल और निवेशकों की रणनीति

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक मौद्रिक नीतियों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों और घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी में आकर फैसले न लें और अपने पोर्टफोलियो को मजबूत तथा विविध बनाए रखें। उत्तर भारत के निवेशक भी इन आर्थिक हलचलों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि महंगाई और बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम आदमी की बचत और निवेश योजनाओं पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के नजरिए से गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश करना ही इस माहौल में सबसे समझदारी भरा कदम साबित होगा।
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