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टेक्नोलॉजी एक्सचेंज: भारत करेगा यूएई, चीन और रूस के साथ परमाणु तकनीक का आदान-प्रदान

भारत वैश्विक मंच पर तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ब्रिक्स देशों के साथ विशेषज्ञ तकनीक साझा करने की इस पहल के तहत भारत यूएई, चीन और रूस के साथ न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी एक्सचेंज करेगा।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 15:40
टेक्नोलॉजी एक्सचेंज: भारत करेगा यूएई, चीन और रूस के साथ परमाणु तकनीक का आदान-प्रदान
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास को एक नई दिशा देते हुए भारत ने प्रमुख देशों के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। हाल ही में सामने आई जानकारियों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के नेटवर्क के माध्यम से उन्नत विशेषज्ञ तकनीक को साझा किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के तहत भारत विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), चीन और रूस जैसे देशों के साथ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीक का आदान-प्रदान करेगा। इस रणनीतिक कदम से न केवल ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी क्षमताएं मजबूत होंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और औद्योगिक सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।

बजाज न्यूक बिज की सीईओ सुनीता कुमार के साथ खास बातचीत

इस महत्वपूर्ण विषय पर अधिक प्रकाश डालते हुए बजाज न्यूक बिज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुनीता कुमार ने एक विशेष चर्चा के दौरान कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक परमाणु ऊर्जा प्रणालियों और विशेषज्ञ तकनीकों का यह आदान-प्रदान आने वाले समय में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है। बढ़ती वैश्विक ऊर्जा मांगों और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की तलाश के बीच इस प्रकार का तकनीकी सहयोग अत्यधिक प्रासंगिक हो जाता है। सुश्री कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच इस तरह की साझीदारी से तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और मजबूत होगा। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में इस सहयोगात्मक पहल के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को अपनाने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है। विभिन्न देशों के पास मौजूद विशेषज्ञता और उन्नत अनुसंधान का लाभ उठाकर साझा परियोजनाओं को गति दी जा सकेगी। हालांकि, इस तरह के बड़े तकनीकी आदान-प्रदान में सुरक्षा मानकों, नियामक अनुपालनों और दीर्घकालिक रणनीतिक समझौतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिन पर संबंधित अधिकारी और विशेषज्ञ बारीकी से काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इस तकनीकी एक्सचेंज के माध्यम से नए अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, संयुक्त परियोजनाओं और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत की यह पहल अंतरिक्ष और रक्षा के साथ-साथ अब परमाणु ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत वैश्विक स्थिति दर्ज कराने की रणनीति का हिस्सा है। जैसे-जैसे इस दिशा में और समझौते आगे बढ़ेंगे, देश के ऊर्जा परिदृश्य में इसके सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेंगे।
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