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वैश्विक मंच पर गूंज: ब्रिक्स समिट की किट में शामिल हुए बिहार के सत्तू और मखाना

बिहार के पारंपरिक और पौष्टिक खान-पान को अब वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। प्रतिष्ठित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मेहमानों को दी जाने वाली विशेष किट में बिहार के प्रसिद्ध सत्तू और मखाना को शामिल किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की सांस्कृतिक और पाक कला की धाक जमेगी।

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Ankit Yadav
13 सित 2026, 14:22
वैश्विक मंच पर गूंज: ब्रिक्स समिट की किट में शामिल हुए बिहार के सत्तू और मखाना
बिहार के लिए एक गर्व का क्षण आ गया है, क्योंकि राज्य की पारंपरिक खाद्य वस्तुएं अब दुनिया भर के विशिष्ट मेहमानों तक पहुंचेंगी। हाल ही में हुए एक बड़े विकास क्रम में, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार की जाने वाली आधिकारिक स्वागत किट में बिहार के सत्तू और मखाना को प्रमुखता से जगह दी गई है। यह कदम न केवल इन स्थानीय उत्पादों को एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी मांग और प्रतिष्ठा को भी अभूतपूर्व बढ़ावा देगा। लखनऊ, दिल्ली और पटना जैसे राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस बात की खासी चर्चा है कि कैसे क्षेत्रीय व्यंजनों को इस तरह के बड़े कूटनीतिक और आर्थिक आयोजनों में स्थान मिल रहा है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी मांग

सत्तू और मखाना दोनों ही स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद फायदेमंद माने जाते हैं और इनकी जड़ें बिहार की मिट्टी से गहराई से जुड़ी हुई हैं। मखाना अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, जबकि सत्तू को ऊर्जा का एक प्राकृतिक और बेहतरीन स्रोत माना जाता है। जब दुनिया भर के बड़े नेता और प्रतिनिधि ब्रिक्स सम्मेलन में इन उत्पादों को उपहार स्वरूप प्राप्त करेंगे, तो इससे इन वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग स्वतः ही हो जाएगी। कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतिष्ठित आयोजनों में स्थानीय उत्पादों के शामिल होने से निर्यात को बढ़ावा मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। स्थानीय किसानों और उत्पादकों में भी इस घोषणा के बाद काफी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। लंबे समय से यह प्रयास किए जा रहे थे कि बिहार के पारंपरिक व्यंजनों और उत्पादों को भौगोलिक संकेत यानी जीआई टैग के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी उचित पहचान मिले। इस दिशा में ब्रिक्स किट में उनका चयन एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में इससे न केवल व्यापारिक अवसरों में बढ़ोतरी होगी, बल्कि दुनिया भर के लोग बिहार की समृद्ध खान-पान संस्कृति से भली-भांति परिचित हो सकेंगे। सरकारी स्तर पर भी इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश के कोने-कोने से लेकर विदेशों तक इनकी पहुंच आसान बनाई जा सके। चाहे वह राजधानी दिल्ली के सरकारी गलियारे हों या उत्तर प्रदेश और बिहार के स्थानीय बाजार, हर जगह इस बात की सराहना हो रही है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता को अब वैश्विक कूटनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान मिलने वाली यह किट देश की सांस्कृतिक कूटनीति का एक अनूठा उदाहरण बनेगी।
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