इंजीनियरिंग के छात्रों का हैरान करने वाला अपराध देश के तकनीकी संस्थानों से उच्च शिक्षा हासिल करने की राह पर निकले कुछ युवा जब अध्ययन के मोर्चे से भटककर अपराध की दुनिया में कदम रखते हैं, तो समाज का चिंतित होना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र अपनी कक्षाओं के दौरान ही इस बात की योजना बनाते थे कि उन्हें किस प्रकार और किस इलाके में आपराधिक वारदातों को अंजाम देना है। ये छात्र अपनी पहचान छिपाकर और सुनियोजित तरीके से सुबह के वक्त उन रास्तों पर निकलते थे जहां लोग टहलने के लिए आते थे। अकेले या सुनसान रास्तों पर टहल रहे बुजुर्गों तथा महिलाओं को देखकर वे अपनी मोटरसाइकिल या वाहन से उनके करीब पहुंचते थे और उनके गले में पहनी हुई सोने या अन्य धातुओं की कीमती चेन झपटकर तेजी से फरार हो जाते थे। पुलिस जांच के दौरान जब इन आरोपियों की पृष्ठभूमि का पता चला और यह सामने आया कि वे किसी प्रतिष्ठित कॉलेज में इंजीनियरिंग की तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, तो अनुसंधान अधिकारियों के होश उड़ गए। इस तरह के मामलों में अक्सर यह देखा जाता है कि युवा अपनी विलासिता की जरूरतों को पूरा करने, महंगे गैजेट खरीदने या अन्य गलत आदतों के दलदल में फंसकर इस प्रकार के शॉर्टकट अपना लेते हैं, जो उनके पूरे जीवन को बर्बाद कर देता है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और उनके पास से छीनी गई संपत्ति तथा अपराध में प्रयुक्त वाहनों को भी बरामद करने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
बढ़ते अपराधों के पीछे की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि आज के दौर में तकनीकी और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का इस तरह गंभीर आपराधिक वारदातों में संलिप्त होना हमारे पूरे शिक्षा तंत्र, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक ताने-बाने पर एक गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आधुनिक युग की चकाचौंध, सोशल मीडिया पर दिखने वाली कृत्रिम जीवनशैली और रातोंरात अमीर बनने की लालसा युवाओं को गलत रास्ते पर धकेल रही है। कॉलेज परिसरों में प्रवेश लेने वाले छात्र जब अपने मुख्य उद्देश्य यानी शिक्षा और करियर निर्माण से भटक जाते हैं, तो वे अक्सर गलत संगति के प्रभाव में आ जाते हैं। इस प्रकार की घटनाओं के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि कई बार अभिभावक अपने बच्चों को कॉलेज भेज तो देते हैं, लेकिन वे इस बात पर नजर नहीं रख पाते कि उनके बच्चे अपनी कक्षाओं के बाद का समय कहां और किन लोगों के साथ बिता रहे हैं। शिक्षण संस्थानों की यह भी नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपने परिसरों में विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, उनकी गतिविधियों और उनके व्यवहार पर भी सूक्ष्म निगरानी रखें ताकि समय रहते किसी भी छात्र को भटकाव से बचाया जा सके। जब इस तरह के मेधावी या तकनीकी रूप से दक्ष छात्र आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो न केवल उनका अपना भविष्य अंधकारमय होता है, बल्कि उनके माता-पिता के वर्षों के सपने भी पल भर में चकनाचूर हो जाते हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि युवाओं में नैतिक शिक्षा का घटता स्तर और बढ़ती उपभोक्तावादी संस्कृति इस तरह के अपराधों को बढ़ावा देने में सबसे बड़ा उत्प्रेरक का काम कर रही है, जिस पर समाज के हर वर्ग को मिलकर गंभीरता से विचार करने की अत्यंत आवश्यकता है।
कानूनी शिकंजा और भविष्य पर मंडराते गंभीर खतरे कानून की नजर में अपराध चाहे किसी साधारण व्यक्ति ने किया हो या किसी उच्चशिक्षित इंजीनियरिंग के छात्र ने, उसके परिणाम सभी के लिए समान रूप से कठोर होते हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और संबंधित आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। अदालत में इस प्रकार के मामलों की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों की शैक्षणिक योग्यता उन्हें सजा से राहत दिलाने का आधार नहीं बन सकती, बल्कि अदालतें ऐसे मामलों में और अधिक सख्ती बरतती हैं क्योंकि पढ़े-लिखे लोगों द्वारा किया गया अपराध समाज के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। इस घटना के सामने आने के बाद संबंधित कॉलेज प्रशासन भी अपनी साख बचाने और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सक्रिय हो गया है तथा ऐसे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दूसरी ओर, इस प्रकार की घटनाओं से आम नागरिकों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है, जिससे पुलिस प्रशासन को सुबह के समय गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए विवश होना पड़ता है। आने वाले दिनों में इस मामले की चार्जशीट दाखिल होने के बाद त्वरित अदालती कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, ताकि यह एक कड़ा संदेश बन सके कि शिक्षा की आड़ में कानून को हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनका यह काला कारनामा अंततः उनके पूरे करियर को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा।