उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से संचालित होने वाले इस संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट ने धोखाधड़ी का एक बेहद हाई-प्रोफाइल और जटिल तरीका अपनाया हुआ था। इस गिरोह के सदस्य खुद को अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई यानी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के साथ-साथ दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनियों जैसे अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट के प्रतिनिधि के रूप में पेश करते थे। वे विदेशी नागरिकों और विशेष रूप से अमेरिका में रहने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार के फर्जी सुरक्षा अलर्ट, कानूनी कार्रवाई की धमकियों या तकनीकी खराबी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद, पीड़ितों से भारी-भरकम रकम अवैध खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इस तरह वसूली गई अकूत काली कमाई को भारत लाने या यहाँ के स्थानीय खातों में सीधे मंगाने के बजाय, गिरोह के गुर्गे अमेरिका में ही उस रकम से शुद्ध सोना खरीदते थे और उसे पार्सल के जरिए सुनियोजित तरीके से भारत स्थित अपने ठिकानों तक मंगवाते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों और कानून प्रवर्तन विभागों की नज़रों से आसानी से बचा जा सके।
इस तरह के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों का जाल पिछले कुछ वर्षों में देश के कई बड़े महानगरों और टियर-2 शहरों में तेजी से फैला है, जहाँ तकनीकी रूप से दक्ष लेकिन गलत रास्ते पर निकले युवा इस तरह के फर्जी कॉल सेंटर और ऑनलाइन स्कैम नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। इस मामले में लखनऊ पुलिस और विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों की खुफिया इकाइयों को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि शहर के कुछ हिस्सों से अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के नागरिकों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की जा रही है। ये अपराधी वीओआईपी कॉलिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके अपनी असली लोकेशन छिपाते थे और खुद को विदेशी धरती पर बैठे आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर स्थापित करते थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रकार के सिंडिकेट केवल अकेले काम नहीं करते, बल्कि इनके तार देश के बाहर बैठे हवाला कारोबारियों और अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं, जो डिजिटल करंसी या अन्य माध्यमों से अवैध धन को इधर-उधर करने में इनकी मदद करते हैं।
इस बड़े खुलासे के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने और इसके अन्य छिपे हुए चेहरों बेनकाब करने की है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचता है, इसलिए इस रैकेट में शामिल मास्टरमाइंड और उसके स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पार्सल के जरिए अमेरिका से मंगाए गए सोने के खेप और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत जुटाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय और सीमा शुल्क विभाग जैसी एजेंसियों को भी इस जांच में शामिल किया जा सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस बात का भी खुलासा हो सकेगा कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और कितनी संपत्ति अर्जित की है।