कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      'इतना अन्याय किसी परिवार के ऊपर नहीं हुआ होगा...', अखिलेश यादव ने आजम खान के लिए ऐसा क्यों कहा?      अनशन खत्म कराने डिप्टी CM ने लिए थे 500 करोड़? एकनाथ शिंदे vs मनोज जरांगे के बीच अब क्या पंगा      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      गूगल के CEO सुंदर पिचाई से बोले ट्रंप- अभी अटलांटिक का नाम बदलो, फिर मैं प्रशांत      यूं ही नहीं फ्रांस से भारत तक हो रहे दंगे-प्रदर्शन, 13 देशों के 101 संगठनों का सीक्रेट नेटवर्क कर रहा काम      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
क्राइम

अवैध अस्पतालों का खेल: नाम बदलकर दोबारा लाइसेंस हासिल करने का खतरनाक हथकंडा

लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे फर्जी और अवैध चिकित्सा संस्थानों ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नियमों की अनदेखी कर सील किए जाने वाले संस्थान अब नए बैनर और बदले हुए नामों से दोबारा पंजीकरण हासिल कर रहे हैं।

A
Ankit Yadav
21 सित 2026, 11:22
अवैध अस्पतालों का खेल: नाम बदलकर दोबारा लाइसेंस हासिल करने का खतरनाक हथकंडा

लखनऊ में नाम बदलकर चल रहा अवैध अस्पतालों का गोरखधंधा राजधानी लखनऊ के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला खेल सामने आ रहा है जिसके तहत अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल और क्लीनिक प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं। जब किसी ऐसे चिकित्सा संस्थान पर मानकों की अनदेखी या मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में शिकंजा कसा जाता है और उसे बंद या सील किया जाता है, तो उसके संचालक कुछ समय बाद बिल्कुल नए नाम से उसी परिसर या आसपास के इलाके में दोबारा परमिट प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। इस तरह के मामलों में कागजी दस्तावेजों में हेरफेर करके पुराने इतिहास को छुपाया जाता है और अधिकारियों की आंख में धूल झोंककर नया लाइसेंस जारी करवा लिया जाता है। लखनऊ जैसे बड़े महानगर में इस प्रकार की गतिविधियों के कारण आम जनता की जान पर लगातार बड़ा खतरा मंडरा रहा है क्योंकि बिना किसी प्रशिक्षित स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं के चलने वाले ये संस्थान मरीजों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं और जिला प्रशासन के कड़े आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं।

प्रशासनिक चूक और पंजीकरण प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा इस तरह की गंभीर अनियमित्ताओं के पनपने के पीछे मुख्य रूप से प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही और पंजीकरण प्रक्रिया में मौजूद तकनीकी खामियां जिम्मेदार मानी जाती हैं। जब भी स्वास्थ्य विभाग किसी अवैध क्लीनिक पर ताला लगाता है, तो उसके संचालकों को यह बखूबी पता होता है कि किस प्रकार कागजी औपचारिकताओं को पूरा करके नया पंजीकरण हासिल किया जा सकता है। कई बार निरीक्षण के दौरान मिलने वाली कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है या फिर मिलीभगत के चलते पुराने मामलों की फाइलें दबा दी जाती हैं। ऐसे संस्थानों के पास न तो योग्य डॉक्टरों की टीम होती है और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था, इसके बावजूद उन्हें अनुमति मिल जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है। इस खेल में बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र की सक्रियता भी साफ तौर पर दिखाई देती है जो चंद पैसों के लालच में जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की बलि चढ़ाने से नहीं हिचकते हैं। लखनऊ के विभिन्न इलाकों में फैल रहे इस अवैध नेटवर्क ने आम आदमी के मन में सरकारी व्यवस्था के प्रति गहरी निराशा पैदा कर दी है और लोग अब झोलाछाप संस्कृति के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने लगे हैं।

भविष्य की सख्त कार्रवाई और स्वास्थ्य विभाग की नई रणनीति इस बढ़ते हुए खतरे को भांपते हुए अब उच्च स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसे बहुरुपिया अस्पतालों के खिलाफ एक व्यापक और निर्णायक अभियान चलाने का मन बना लिया है। भविष्य में इस प्रकार की धांधली को रोकने के लिए पंजीकरण के वक्त संचालकों के पिछले रिकॉर्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और संस्थान की पुरानी लोकेशन का कड़ाई से सत्यापन किए जाने की योजना तैयार की जा रही है। यदि किसी पुराने सील किए गए अस्पताल के संचालक नए नाम से आवेदन करते हुए पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ न केवल आवेदन तुरंत खारिज किया जाएगा बल्कि आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही लखनऊ के सभी जोन में औचक निरीक्षण दलों का गठन किया जाएगा जो समय-समय पर अस्पतालों के दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की क्रॉस-चेकिंग करेंगे। आम जनता को भी यह सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी नए अस्पताल में इलाज कराने से पहले उसके डॉक्टरों की योग्यता और संस्थान की वैधानिकता की पूरी जांच अवश्य कर लें ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके और इस अवैध खेल पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सके।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज