भागीरथ पैलेस में छापेमारी के दौरान बड़ी खेप बरामद दिल्ली के थोक दवा बाजार कहे जाने वाले भागीरथ पैलेस इलाके में प्रवर्तन और जांच एजेंसियों ने एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए नकली रेबीज के टीके बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौके से रेबीज के इंजेक्शनों की कुल 481 नकली इकाइयां या यूनिट्स बरामद की गईं, जिन्हें बाजार में बेहद शातिर तरीके से असली खुराकों के रूप में खपाने की पूरी तैयारी चल रही थी। स्वास्थ्य विभाग और सुरक्षा बलों को पिछले काफी समय से इस प्रकार के अवैध और खतरनाक कार्यों की लगातार खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद इस सुनियोजित छापेमार अभियान को सफलता के साथ पूरा किया गया। बरामद की गई इन नकली दवाइयों के नमूनों को सील करके प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेज दिया गया है ताकि यह स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके कि इनमें किस प्रकार के हानिकारक तत्वों या पदार्थों का उपयोग किया गया था। इस प्रकार के जीवन रक्षक टीकों की नकली खेप का खुलेआम बाजार में बिकना न केवल कानून के शासन को खुली चुनौती है, बल्कि सीधे तौर पर आम नागरिकों की अनमोल जिंदगियों के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ भी है।
कानपुर तक जुड़े मिले इस खतरनाक जाल के तार प्रारंभिक जांच-पड़ताल और आरोपियों से हुई पूछताछ के दौरान इस बात के पुख्ता प्रमाण हाथ लगे हैं कि इस अवैध रैकेट का मुख्य नेटवर्क केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके गहरे तार उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से भी जुड़े हुए हैं। इस गोरखधंधे को संचालित करने वाले मुख्य सरगना और उनके स्थानीय सहयोगियों ने एक ऐसा सुनियोजित जाल फैला रखा था, जिसमें उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से नकली फार्मास्यूटिकल उत्पादों की खरीद-फरोख्त की जाती थी। इस तरह के मामलों में आमतौर पर यह देखा गया है कि संगठित अपराधी गिरोह ऐसे संवेदनशील और महंगे टीकों को अपनी अवैध प्रयोगशालाओं में बेहद कम लागत पर तैयार करवाते हैं और फिर उन्हें वैध आपूर्ति श्रृंखला के जरिए बाजारों में सप्लाई कर देते हैं। इस पूरे मामले में कानपुर के संभावित ठिकानों और संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की गहराई से छानबीन शुरू कर दी गई है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके और इसमें शामिल अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। स्थानीय पुलिस और विशेष कार्य बल इस बात की भी बहुत बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इन नकली टीकों का वितरण किसी बड़े सरकारी या निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से तो नहीं किया जा रहा था।
आने वाले दिनों में होगी व्यापक स्तर पर कार्रवाई इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से ही देश भर की दवा नियामक संस्थाओं और स्वास्थ्य विभागों में भारी हड़कंप मच गया है, और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब देश भर में विशेष चेकिंग अभियानों की शुरुआत कर दी गई है। जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि यह अवैध रूप से तैयार की गई खेप बाजार में कहां-कहां और किन लोगों तक पहुंचाई जा चुकी है, ताकि समय रहते उन मरीजों की पहचान की जा सके जिन्हें ये नकली टीके लगाए जा चुके हैं। इस प्रकार की गंभीर धोखाधड़ी और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों के खिलाफ कानून की बेहद सख्त धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आने वाले समय में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी के लिए यदि किसी व्यक्ति को नकली या प्रभावहीन टीका लगा दिया जाए, तो संक्रमण के फैलने पर मरीज की जान भी जा सकती है, जिसके कारण इस अपराध की श्रेणी बेहद गंभीर हो जाती है। आम नागरिकों से भी यह अपील की जा रही है कि वे किसी भी दवा की खरीदारी केवल अधिकृत और भरोसेमंद मेडिकल स्टोरों से ही करें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित प्रशासन को दें ताकि इस प्रकार के खतरनाक रैकेटों का पूरी तरह से सफाया किया जा सके।