संयुक्त टीम की छापेमारी और जब्ती
मंगलवार की रात को प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा विभाग के नुमाइंदों ने एक बड़ी कार्रवाई पूरी की। इस संयुक्त अभियान में उपजिलाधिकारी व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नारायणी भाटिया के साथ सहायक पुलिस अधीक्षक श्लोक गौतम ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके साथ खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर एक डेयरी परिसर पर अचानक धावा बोल दिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान संडीला क्षेत्र के रहने वाले डेयरी संचालक प्रदीप गुप्ता भी मौके पर ही उपस्थित मिले। तलाशी के दौरान परिसर के भीतर खड़े दो बड़े टैंकरों के अंदर तरल पदार्थ भरा हुआ पाया गया। इसके अलावा वहां पर पाउडर की कई बोरियां और तमाम तरह के रसायन भी रखे हुए मिले जिन्हें देखकर टीम ने फौरन अपनी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी। खाद्य सुरक्षा विभाग के अमले ने वहां रखे गए संदिग्ध तरल और अन्य सामग्रियों के कुल सात नमूने सुरक्षित तरीके से एकत्र किए। इन सभी नमूनों को सील करने के बाद आगे की जांच के लिए तुरंत प्रयोगशाला भेज दिया गया है ताकि वास्तविकता का पता चल सके। इस कार्रवाई से पूरे औद्योगिक इलाके में हड़कंप मच गया और कारोबारियों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया।
दूध की आपूर्ति और संदिग्ध नेटवर्क
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि इस इकाई में लंबे समय से बड़े पैमाने पर काम चल रहा था। यहां तैयार होने वाले इस संदिग्ध उत्पाद को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं खपाया जाता था बल्कि इसकी पहुंच दूर-दूर तक थी। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक इस स्थान से लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े महानगरों के अलावा आसपास के कई अन्य जिलों में भी इसकी सप्लाई की जाती थी। इसके साथ ही इस बात की भी खासी चर्चा है कि यहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों तक भी माल भेजा जाता था। इससे पहले भी पश्चिमी क्षेत्र से नकली पनीर और क्रीम जैसे उत्पाद तैयार करके देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े महानगरों में भेजने के मामले सामने आ चुके हैं। इन पुरानी घटनाओं को देखते हुए इस डेयरी के व्यावसायिक संबंधों और संपर्कों को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि अधिकारियों का यह कहना है कि कोई भी पदार्थ मिलावटी है या नहीं और बरामद रसायनों का उपयोग किस काम में हो रहा था, इसकी पक्की पुष्टि केवल प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे कारोबार के दायरे और इसमें शामिल लोगों की असली भूमिका का खुलासा हो पाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र का पुराना आपराधिक इतिहास
संडीला औद्योगिक क्षेत्र में मिलावटखोरी का यह कोई इकलौता या नया मामला नहीं माना जा रहा है। इससे पहले फरवरी 2018 में अभिषेक नाम की एक डेयरी से सत्ताईस हजार लीटर मिलावटी दूध पकड़ा गया था। उस समय वहां से सात प्रकार के हानिकारक रसायन भी बरामद किए गए थे जो बेहद खतरनाक माने जाते हैं। इसके बाद मार्च 2018 के महीने में करीब पचास लाख रुपये मूल्य का मिलावटी पाउडर भी जब्त किया गया था। उन तमाम मामलों में जब प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट मानकों के बिल्कुल विपरीत प्राप्त हुई थी, तब अप्रैल के महीने में सख्त कदम उठाए गए थे। उस वक्त डेयरी चलाने वाले संचालक नवीन मिश्रा और उनके भाई योगेश मिश्रा को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। अब एक बार फिर से इतनी भारी मात्रा में संदिग्ध पदार्थ और तरल मिलने के कारण इस पूरे औद्योगिक क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते कड़ी नजर रखी जाती तो इस तरह के अवैध कार्यों को दोबारा पनपने का मौका नहीं मिलता। अब एक बार फिर से परीक्षण रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है और रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद ही सभी दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।