पूर्वोत्तर राज्यों में छिपकर काट रहा था फरारी कानून के शिकंजे से बचने के लिए आरोपी पिछले दो लंबे वर्षों से लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था। इस दौरान उसने गिरफ्तारी से बचने के वास्ते देश के पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम और दूरदराज इलाकों में शरण ली हुई थी और वहीं रहकर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था। स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए थे और उसके हर एक मूवमेंट पर बारीक नजर बनाए हुए थे। जैसे ही पुलिस को उसकी वर्तमान लोकेशन की सटीक और पुख्ता सूचना मिली, एक विशेष टीम का गठन किया गया और तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे घेर लिया गया। चारों तरफ से पुलिस बल द्वारा की गई इस अचूक घेराबंदी के कारण आरोपी को भागने का कोई भी मौका नहीं मिल पाया और उसने आखिरकार आत्मसमर्पण करने जैसा कदम उठाया या सुरक्षा बलों के सामने धरा गया। गिरफ्तारी के बाद उसे संबंधित थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि उसके अन्य साथियों और आपराधिक नेटवर्क का भी पूरा पर्दाफाश किया जा सके।
लंबे समय से थी तलाश और घोषित था इनाम अपराध की दुनिया में इस शातिर अपराधी का पुराना और लंबा इतिहास रहा है जिसके कारण पुलिस थानों में इसके खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज थे। कानून की पहुंच से बाहर होने के कारण पुलिस प्रशासन ने इस पर दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया था ताकि इसके बारे में कोई भी पुख्ता सुराग देने वाले को पुरस्कृत किया जा सके। इतने लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहना और बार-बार अपनी लोकेशन बदलना यह साबित करता है कि वह आपराधिक वारंवारता में काफी शातिर था और पुलिस से बचने के विभिन्न तौर-तरीके अच्छी तरह जानता था। ऐसे मामलों में पुलिस आम तौर पर तकनीकी निगरानी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्थानीय मुखबिर तंत्र का व्यापक इस्तेमाल करती है ताकि फरार चल रहे अपराधियों के छिपे होने के ठिकानों का पता लगाया जा सके। पूर्वोत्तर राज्यों जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में जाकर छिपना अपराधियों के लिए आसान तो होता है, परंतु आधुनिक तकनीक और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के आपसी समन्वय के आगे ज्यादा दिनों तक बचना असंभव सा हो जाता है।
अब कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच शुरू गिरफ्तारी की इस बड़ी सफलता के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने इस अपराधी को अदालत में पेश करने और रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस कार्रवाई से स्थानीय पुलिस ने राहत की सांस ली है क्योंकि लंबे वक्त से पेंडिंग चल रहे इस मामले में आखिरकार कानून का पहरा कसता नजर आ रहा है। न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के पश्चात उसे जेल भेजने या आगे की पुलिस रिमांड पर लेने का निर्णय किया जाएगा ताकि उसके आपराधिक साम्राज्य और छिपे हुए मददगारों के बारे में तमाम परतें उघाड़ी जा सकें। इस प्रकार के अपराधियों के पकड़े जाने से न सिर्फ आम जनता के बीच कानून-व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत होता है बल्कि अपराधियों के मन में भी खाकी का खौफ पैदा होता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से लेकर मुकदमे को तेजी से आगे बढ़ाने तक की पूरी कानूनी कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी ताकि दोषी को कानून के मुताबिक सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।