आवासीय विद्यालय परिसर में गंभीर घटना और आरोपी की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले एक प्रतिष्ठित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय से जुड़ा यह गंभीर मामला सामने आया है जहाँ एक नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इस शर्मनाक घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी कंप्यूटर शिक्षक मौके से फरार हो गया था और पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। स्थानीय थाने में इस बाबत मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने अपनी तकनीकी शाखा की मदद से आरोपी की तलाश तेज कर दी थी। लंबी सुरागरसी और सर्विलांस के आधार पर पुलिस को सुराग मिला कि आरोपी भागकर राजस्थान पहुंच गया है। इसके बाद स्थानीय पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर राजस्थान भेजी गई जिसने वहां स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर आरोपी कंप्यूटर शिक्षक को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद से आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि उससे पूछताछ की जा सके।
एकलव्य विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था और छात्राओं की संरक्षा पर सवाल देशभर में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एकलव्य विद्यालयों की स्थापना की गई है जहाँ छात्र और छात्राएं परिसर के भीतर छात्रावासों में रहकर अध्ययन करती हैं। इन परिसरों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की तैनाती के दौरान उनके पृष्ठभूमि सत्यापन और चरित्र प्रमाण पत्रों की अनिवार्यता पर विशेष बल दिया जाता है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके बावजूद इस प्रकार की घटनाएं आवासीय संस्थानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। जब इस तरह के शिक्षण संस्थानों में तैनात शिक्षक ही बच्चों के संरक्षक बनने के बजाय उनके उत्पीडऩ में लिप्त पाए जाते हैं, तो अभिभावकों का विश्वास व्यवस्था से डगमगाने लगता है। इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है और इस प्रकार के संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सख्त नैतिक निगरानी की मांग जोर पकड़ रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल मिल सके।
कानूनी प्रक्रिया, पोक्सो अधिनियम और अगली विधिक कार्रवाई नाबालिग पीड़िता के साथ घटित इस घिनौने कृत्य के बाद पुलिस प्रशासन इस मामले में बेहद गंभीर रुख अपना रहा है और आरोपी शिक्षक के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं के साथ-साथ बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम यानी पोक्सो एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपी को राजस्थान से हिरासत में लेने के बाद उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा और पुलिस अभिरक्षा में लेकर घटना से जुड़े तमाम साक्ष्य जुटाए जाएंगे। इस तरह के मामलों में त्वरित गति से जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल करना एक बड़ी चुनौती होती है ताकि अदालत से आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। दूसरी ओर विद्यालय प्रबंधन और संबंधित सरकारी विभाग भी इस मामले में आंतरिक जांच बिठाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी को भागने में या इस घटना को छिपाने में किसी अन्य स्तर पर लापरवाही तो नहीं बरती गई थी। समाज कल्याण और महिला सुरक्षा संगठनों ने भी इस मामले की निष्पक्ष और तेज सुनवाई की मांग की है।