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बड़ी कार्रवाई: ग्वालियर पुलिस ने करोड़ों की ठगी करने वाले 6 म्यूल अकाउंट एजेंटों को दबोचा

ग्वालियर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाते हुए करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने फर्जी खातों का इस्तेमाल करने वाले 6 म्यूल अकाउंट एजेंटों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने इस गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए जांच तेज कर दी है।

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Ankit Yadav
05 अक्ट 2026, 11:39
बड़ी कार्रवाई: ग्वालियर पुलिस ने करोड़ों की ठगी करने वाले 6 म्यूल अकाउंट एजेंटों को दबोचा

ग्वालियर में साइबर ठगी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थानीय पुलिस प्रशासन ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बेहद सख्त अभियान चलाया है। इस सुनियोजित अभियान के तहत पुलिस ने करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि की ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए सभी आरोपी म्यूल अकाउंट एजेंट के रूप में इस पूरे अवैध नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। ये लोग भोले-भाले नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर उनके बैंक खातों का अवैध इस्तेमाल करते थे। इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी के जरिए कमाए गए काले धन को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से साइबर अपराधियों के इस बड़े नेटवर्क को तगड़ा झटका लगा है। स्थानीय नागरिकों और पुलिस के बीच इस सफलता को लेकर काफी चर्चा हो रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस प्रकार के अन्य एजेंटों की तलाश में भी लगातार छापेमारी की जा रही है।

गिरफ्तार म्यूल अकाउंट एजेंटों की संदिग्ध कार्यप्रणाली

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपी लंबे समय से साइबर ठगों के संपर्क में थे। ये म्यूल अकाउंट एजेंट आम जनता को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर उनके नाम पर नए बैंक खाते खुलवाते थे। इन फर्जी या किराए के खातों का उपयोग मुख्य रूप से ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम को जमा करने के लिए किया जाता था। जैसे ही किसी पीड़ित व्यक्ति से साइबर ठगों द्वारा ठगी की जाती थी, उस पैसे को तुरंत इन म्यूल खातों में भेज दिया जाता था। इसके बाद इन एजेंटों का काम उस पैसे को अलग-अलग माध्यमों से निकालकर अपराधियों तक पहुँचाना होता था। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक पासबुक भी बरामद किए हैं। पूछताछ के दौरान इन लोगों ने कई अहम खुलासे किए हैं जिनकी मदद से अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के एजेंट बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर भोले-भाले लोगों को अपना मोहरा बनाते थे। पुलिस अब इन खातों में हुए लेन-देन का पूरा विवरण खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के सभी सरगनाओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

साइबर अपराध और म्यूल खातों की पृष्ठभूमि का महत्व

आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में लगातार तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन को छिपाने के लिए करते हैं। इन खातों का असली मालिक कोई और होता है जबकि इनका संचालन पूरी तरह से किसी और के हाथ में होता है। पुलिस और बैंकिंग संस्थान मिलकर ऐसे संदिग्ध खातों की पहचान करने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस प्रकार की गिरफ्तारियां आम जनता को यह संदेश देती हैं कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति अपने खाते का इस्तेमाल किसी अन्य को करने के लिए देता है, तो वह भी कानूनी रूप से इस अपराध में भागीदार माना जाता है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और अदालत में पेश कर आरोपियों से रिमांड की मांग की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस तरह के अभियानों से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोहों के हौसले पस्त होंगे और आम जनता को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

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