निजी हॉस्टल से बच्चों का गायब होना और वाहन से मादक पदार्थों की तस्करी मध्य प्रदेश के भीतर सुरक्षा एजेंसियों के सामने इस समय दो बेहद गंभीर और पेचीदा मामले चुनौती बनकर सामने आए हैं। सबसे पहले एक स्थानीय निजी आवासीय संस्थान यानी हॉस्टल से तीन बच्चों के अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो जाने की सूचना मिलने के बाद से अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भारी हड़कंप मचा हुआ है। हॉस्टल प्रबंधन की इस बड़ी लापरवाही को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है क्योंकि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से संस्था पर होती है। वहीं दूसरी घटना के तहत पुलिस ने एक संदिग्ध महिंद्रा थार गाड़ी को रोककर उसकी तलाशी ली जिसके भीतर से भारी मात्रा में अवैध गांजा बरामद किया गया। इस गाड़ी का इस्तेमाल मादक पदार्थों की एक जगह से दूसरी जगह तस्करी करने के लिए किया जा रहा था जिसे खुफिया इनपुट के आधार पर रोका गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस बल ने मौके से दो मुख्य तस्करों को भी गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है जिनसे पूछताछ का दौर लगातार जारी है ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य बड़े चेहरों का भी पर्दाफाश किया जा सके।
राज्य में हॉस्टल सुरक्षा व्यवस्था और मादक पदार्थों के नेटवर्क की पड़ताल इस प्रकार की घटनाएं इस बात का गंभीर संकेत देती हैं कि किस तरह से राज्य के भीतर बच्चों की देखरेख वाले संस्थानों और युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाले अवैध धंधों का जाल फैल रहा है। निजी हॉस्टलों में सुरक्षा के नाम पर भारी भरकम फीस वसूली जाती है परंतु ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन देखने को मिलता है। सीसीटीवी कैमरों की कमी और सुरक्षा गार्डों की लापरवाही के कारण इस तरह के हादसों की आशंका हमेशा बनी रहती है। दूसरी तरफ मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब अपराधी प्रवृत्ति के लोग आम वाहनों की बजाय महंगी और तेज रफ्तार गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि पुलिस की चेकिंग के दौरान आसानी से शक के दायरे से बचा जा सके। थार जैसी गाड़ियों का इस अवैध काम में प्रयोग यह दर्शाता है कि तस्करी करने वाले गिरोह कितने आधुनिक और साधन संपन्न हो चुके हैं। इस तरह के तस्कर अक्सर सुनसान रास्तों और अंतरराज्यीय सीमाओं का लाभ उठाकर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देते हैं जिससे युवा पीढ़ी नशे की गर्त में धकेल दी जाती है। समाज के इन दोनों पहलुओं पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और नशा मुक्ति दोनों ही किसी भी सभ्य समाज के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पुलिस जांच का दायरा और आगामी प्रशासनिक सख्त कदम इन सनसनीखेज मामलों के सामने आने के बाद अब स्थानीय पुलिस प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव बन गया है। लापता हुए तीनों बच्चों की तलाश के लिए पुलिस की कई विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है जो आसपास के इलाकों और रेलवे स्टेशनों तथा बस अड्डों पर लगातार दबिश दे रही हैं ताकि बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद किया जा सके। इसके अलावा हॉस्टल प्रशासन से भी पूछताछ की जा रही है कि आखिर बच्चों की इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और रजिस्टर में उनकी आवाजाही का पूरा हिसाब क्यों नहीं रखा गया था। गांजे की तस्करी के मामले में पकड़े गए दोनों आरोपियों से रिमांड के दौरान उन तमाम ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है जहां से यह खेप लाई गई थी और इसे आगे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तस्करी नेटवर्क की जड़ें काफी गहरी हो सकती हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां भी देखने को मिल सकती हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिए जा रहे हैं कि नियमों की अनदेखी करने वाले सभी निजी हॉस्टलों का औचक निरीक्षण किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर उनके लाइसेंस रद्द करने की कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।