जहरीली शराब सेवन से जान गंवाने वालों का आंकड़ा पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के भीतर एक भयंकर जनहानि का मामला उजागर हुआ है जिसमें गैरकानूनी तरीके से तैयार किए गए घातक मादक पेय का सेवन करने की वजह से कुल उन्नीस नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इस अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के बाद से पीड़ित परिवारों के बीच कोहराम मच गया है और स्थानीय बस्तियों में भारी गमगीन माहौल व्याप्त है। मृतकों के बारे में जानकारी मिलने के तुरंत पश्चात क्षेत्रीय पुलिस प्रशासन तथा अन्य संबंधित महकमों के नुमाइंदे हरकत में आ गए और फौरन घटनास्थल की ओर कूच किया। इस प्रकार की त्रासदियों में अक्सर यह देखा जाता है कि अवैध रूप से बनने वाले इन नशीले पदार्थों में बेहद खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है जो शरीर के भीतर जाते ही जानलेवा साबित होते हैं। इस विशेष प्रकरण के संबंध में पुलिस महकमे के उच्चाधिकारियों ने कड़े निर्देश जारी करते हुए मामले की तह तक जाने के लिए व्यापक स्तर पर तफ्तीश शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन जहरीले पदार्थों की आपूर्ति का मुख्य स्रोत कहां पर स्थित था और इसके पीछे कौन लोग संलिप्त हैं।
राज्य में लागू सख्त नियमों के बावजूद गंभीर चूक हैरानी की बात यह है कि इस विशिष्ट क्षेत्र के भीतर लंबे समय से शराब की बिक्री और सेवन पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी लागू की गई है ताकि समाज में इस प्रकार की कुरीतियों और हादसों पर लगाम लगाई जा सके। इसके बावजूद इस तरह की बड़ी घटना का घटित होना इस बात की तस्दीक करता है कि कागजी प्रतिबंधों के परे धरातल पर अवैध कारोबार का नेटवर्क किस प्रकार चुपचाप सक्रिय रहता है। जब भी इस तरह के सख्त प्रतिबंध किसी भौगोलिक क्षेत्र में लागू होते हैं तो उसके पीछे जनहित और स्वास्थ्य सुरक्षा का मूल उद्देश्य होता है, परंतु असामाजिक तत्वों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर गैरकानूनी तरीके से जहरीले रसायनों का व्यापार जारी रखा जाता है। इस संदर्भ में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का यह मानना है कि प्रशासनिक तंत्र की तरफ से निगरानी प्रणाली में यदि और अधिक सख्ती बरती जाए तभी ऐसे जानलेवा काले धंधों पर मुकम्मल अंकुश लगाया जा सकता है। पूर्व में भी देश के विभिन्न हिस्सों से इस प्रकार के दर्दनाक हादसे सामने आते रहे हैं जहाँ प्रतिबंधों के बावजूद अवैध रूप से तैयार की गई घटिया क्वालिटी की सामग्री आम जनता की असमय मृत्यु का कारण बनती रही है जिसके कारण नीति निर्माताओं और कानून क्रियान्वयन एजेंसियों को अपनी कार्यशैली पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता महसूस होती है।
पुलिस की ताबड़तोड़ जांच और संभावित सख्त कार्रवाई इस वीभत्स हादसे के प्रकाश में आने के बाद से ही राज्य की पुलिस व्यवस्था ने अपनी पूरी ताकत इस प्रकरण की गुत्थी सुलझाने में झोंक दी है और विभिन्न ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। प्रारंभिक तौर पर सामने आई जानकारियों के आधार पर पुलिस उन तमाम संदिग्ध ठिकानों की फेरसूस्ती तैयार कर रही है जहाँ से इस प्रकार की अवैध सामग्री की तस्करी या निर्माण किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में संलिप्त मुख्य सौदागरों और उनके मददगारों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है जो संभावित ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दे रही हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस हादसे में जिन लोगों की तबियत बिगड़ी है और जो अन्य नागरिक अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, उन्हें हरसंभव चिकित्सीय सहायता मुहैया कराई जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति के जीवन पर मंडराते खतरे को टाला जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सियासी गलियारों और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े कदम उठाए जाने की संभावना है तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के शिकंजे से बचने का मौका नहीं दिए जाने का संकल्प सुरक्षा एजेंसियों द्वारा व्यक्त किया गया है।