दिल्ली के पुराने हत्याकांड का सनसनीखेज पर्दाफाश दिल्ली की सीमाओं के भीतर लगभग चौबीस साल पहले एक गंभीर आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया था, जिसने उस समय सनसनी फैला दी थी। इस मामले में मुख्य रूप से शामिल आरोपी तभी से फरार चल रहा था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से दूर रहने के लिए उसने अपनी पहचान पूरी तरह से बदल ली थी। लंबी अवधि तक कोई सुराग न मिलने के कारण यह फाइल एक अनसुलझी पहेली की तरह बनी हुई थी, लेकिन जांच अधिकारियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और तकनीकी निगरानी तथा खुफिया तंत्र का लगातार इस्तेमाल किया। आखिरकार पुलिस दल को एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई, जिसके आधार पर हरियाणा के मानेसर इलाके में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उस संदिग्ध व्यक्ति को दबोच लिया, जो इतने लंबे अंतराल से अपनी असली पहचान छिपाकर एक आम नागरिक की तरह जीवन बिता रहा था और शुरुआती पूछताछ में उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पहचान बदलकर मानेसर में काट रहा था सामान्य जीवन फरार रहने के दौरान आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया और खुद को कानून की पहुंच से दूर रखने के वास्ते लगातार ठिकाने बदलता रहा। अंततः उसने हरियाणा के मानेसर क्षेत्र में शरण ली और वहां अपनी आजीविका चलाने के लिए सिलाई-बुधाई का काम यानी दर्जी का पेशा अपना लिया ताकि किसी को भी उसके अतीत पर शक न हो सके। समाज की मुख्यधारा में एक साधारण कारीगर के रूप में घुल-मिलकर रहने के कारण आसपास के लोगों को उसके आपराधिक इतिहास की भनक तक नहीं लगी। इस प्रकार के मामलों में आरोपी अमूमन अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते हैं और स्थानीय स्तर पर नए रिश्ते बना लेते हैं ताकि पुलिस की रडार से बचे रहें। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐसे पुराने मामलों को खंगालना और कोल्ड केस यूनिट्स के जरिए दशकों पुराने अपराधियों को शिकंजे में लेना एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें डिजिटल सर्विलांस, मुखबिरों का नेटवर्क और पुराने दस्तावेजों का मिलान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की कठोर कार्रवाई गिरफ्तारी की यह बड़ी सफलता मिलने के बाद अब पुलिस और संबंधित अदालत इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पकड़े गए आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद रिमांड पर लिया जाएगा ताकि उस दो दशक पुराने कत्ल की रात से जुड़े सभी अनछुए पहलुओं और अन्य संभावित सहायकों के बारे में गहराई से पूछताछ की जा सके। इतने लंबे समय के बाद गवाहों और सबूतों को अदालत में मजबूती से पेश करना अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा, लेकिन पुलिस का दावा है कि उनके पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पहचान की पुष्टि करने वाले दस्तावेज मौजूद हैं। इस कार्रवाई से यह संदेश भी स्पष्ट हो गया है कि गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधी चाहे कितनी भी लंबी अवधि तक छिपकर क्यों न रहें, कानून का शिकंजा उन तक देर-सवेर पहुंच ही जाता है और पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर से जीवंत हो उठी है।