रुआबांधा बाजार में मारपीट की घटना
भिलाई के रुआबांधा क्षेत्र स्थित छत्तीसगढ़ मार्केट के पास शनिवार रात एक मामूली सड़क विवाद ने गंभीर हिंसक रूप ले लिया। सुदीप कुमार साहू और उनके भाई उत्सव साहू हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए बाइक से जा रहे थे, तभी एक सफेद कार को पीछे लेते समय उनकी गाड़ी से टक्कर हो गई। कार चालक ने पास ही स्थित मीट दुकान पर कार्यरत शोहेब खान और नासिर को मौके पर बुला लिया, जिसके बाद करीब सात से आठ लोगों के समूह ने दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। लात-घूंसों और डंडों से लैस हमलावरों ने दोनों पीड़ितों को कुर्सी से रस्सी के जरिए बांध दिया और तब तक प्रताड़ित किया जब तक वे गंभीर रूप से घायल नहीं हो गए। मीट काटने के औजार दिखाकर उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। खून से लथपथ हालत में दोनों भाई किसी तरह जान बचाकर अपने घर पहुंचे और नेवई थाने में घटना की सूचना दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस कार्रवाई और अन्य आपराधिक मामले
भिलाई नगर के सीएसपी निशांत पाठक ने पुष्टि की कि घटना की सूचना मिलते ही गश्ती दल को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया था। घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और मामले में संलिप्त तीन लोगों को जेल भेज दिया गया है। इसी बीच, पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में भी एक अन्य हिंसक वारदात प्रकाश में आई है, जहां वाहन खाली करने को लेकर हुए झगड़े में एक युवक पर जानलेवा हमला हुआ। आरोपी ने शराब की कांच की बोतल को तोड़कर उसके नुकीले हिस्से से युवक की गर्दन पर प्रहार किया, जिससे वह घायल हो गया। पुरानी भिलाई पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और अपराध में इस्तेमाल टूटी हुई बोतल बरामद कर ली है। इसके अलावा, सुपेला पुलिस ने घड़ी चौक के पास मवेशियों के अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। तीन लोगों को एक बोलेरो पिकअप वाहन में भैंस और उसके बछड़े को ले जाते हुए पकड़ा गया है, जिनके पास परिवहन संबंधी कोई भी वैध दस्तावेज नहीं थे और जानवरों के लिए भोजन-पानी का भी प्रबंध नहीं पाया गया था।
समुदाय में आक्रोश और न्याय की मांग
रुआबांधा में हुई मारपीट की घटना को लेकर स्थानीय साहू समाज और पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश व्याप्त है। समाज के जिला अध्यक्ष चंद्र भूषण साहू और रिसाली इकाई के प्रमुख डॉ. कांता साहू ने बताया कि करीब एक साल पहले भी बाजार परिसर में इसी तरह की असुरक्षित घटनाएं सामने आई थीं। परिजनों का कहना है कि भीड़ के बीच जिस तरह उनके बच्चों को बंधक बनाकर बेहोश होने तक पीटा गया, वह उनकी जान लेने का स्पष्ट प्रयास था। उन्होंने पुलिस द्वारा मामले में केवल मामूली धाराएं लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पीड़ित पक्ष अब दुर्ग एसपी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राज्य के गृहमंत्री से मिलकर एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहा है, जिसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे और निष्पक्ष जांच के लिए हर संभव मंच पर अपनी आवाज उठाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।