गोविंद नगर से हुई इनामी बदमाश की गिरफ्तारी
कानपुर नगर में वांछित चल रहे अपराधी वीरेंद्र गुप्ता को पुलिस ने मंगलवार के दिन गोविंद नगर इलाके से दबोच लिया है। कोतवाली एसीपी अमित कुमार पांडेय के मुताबिक, इस अपराधी पर डीसीपी पूर्वी की तरफ से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वीरेंद्र गुप्ता के खिलाफ बर्रा पुलिस थाने में कुल आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से छह मामले लूटपाट की गंभीर वारदातों से संबंधित हैं। लंबे अरसे से कानून की पकड़ से दूर रहने वाले इस गैंगस्टर की तलाश पुलिस को फर्जी दस्तावेज बनाकर अदालत को चकमा देने के मामले में थी। इस अपराधी ने फर्जी जमानतदारों के एक संगठित गिरोह के साथ मिलकर मिलीभगत की थी, जिसके दम पर उसने न्यायालय से जमानत हासिल कर ली थी। पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई में इसे अब जेल भेजा जा रहा है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
जालसाजी और फर्जी जमानत का पूरा खेल
वीरेंद्र गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब पुलिस ने फर्जी जमानतदारों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। यह पूरा प्रकरण नवंबर 2020 का है जब गैंग्सटर कोर्ट के आदेश पर लिपिक किरन शंकर घोष ने मुकदमों की फाइलों की गहन जांच पड़ताल शुरू की थी। इस जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अपराधी खुद को जेल से बाहर निकालने के लिए झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे थे। एक ही व्यक्ति बार-बार अदालत में अलग-अलग मुकदमों में जमानतदार बनकर खड़ा हो रहा था और अपनी पिछली जमानतों की जानकारी कोर्ट से छिपाकर उसे गुमराह किया जाता था। इस रैकेट के माध्यम से कई अपराधियों ने लाभ उठाया था। कोतवाली थाने में इस संबंध में कुल 73 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसके बाद से ही पुलिस इन जालसाजों को ढूंढने का काम कर रही थी।
गिरोह के विरुद्ध पुलिस की निरंतर कार्रवाई
फर्जी जमानतदारों के सिंडिकेट के खिलाफ कानपुर नगर पुलिस का अभियान पिछले काफी समय से जारी है और इसमें लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं। अब तक पुलिस ने इस मामले में नामजद कुल 73 आरोपियों में से 54 को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। हालांकि, अभी भी 19 आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए शुरू की गई जांच ने कई आपराधिक गिरोहों के छिपने के तरीकों का भंडाफोड़ कर दिया है। यह गिरफ्तारी यह साबित करती है कि अदालत की प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। वीरेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी इसी बड़ी कवायद का एक हिस्सा है जिसे पुलिस प्रशासन ने अपनी प्राथमिकता में रखा है। भविष्य में बचे हुए फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम अपने प्रयासों को और अधिक तेज कर रही है।