वाराणसी पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
वाराणसी पुलिस ने 2000 करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी गिरोह से जुड़े एक अहम सदस्य विकास सिंह को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। रोहनिया थाना पुलिस द्वारा बरामद की गई 500 पेटी कफ सीरप के मामले की जांच के दौरान यह सफलता हाथ लगी। जब जांच अधिकारी रांची पहुंचे और वहां के ड्रग विभाग से विस्तृत जानकारी जुटाई, तो विकास सिंह की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो गई। मामूली बिजली उपकरणों का व्यवसाय करने वाले विकास सिंह ने रांची में थ्री बीएचके फ्लैट किराए पर लेकर भोला प्रसाद के साथ मिलकर शांभवी फार्मा नाम से एक दवा एजेंसी का जाल बिछाया था। भोला प्रसाद मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के पिता हैं। जांच में पता चला है कि आरोपी ने न केवल ड्रग लाइसेंस प्राप्त करने में मदद की, बल्कि तस्करी के सरगना शुभम को दो वर्ष का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र भी मुहैया कराया था, जिसका उपयोग करके ही गिरोह ने अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया था।
फर्जीवाड़े का जाल और अन्य आरोपियों की भूमिका
पुलिस की गहन जांच में तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। शुभम जायसवाल ने इसी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर रांची की शैली ट्रेडर्स का कंपीटेंट पर्सन बनकर बड़े पैमाने पर फेंसाडिल कफ सीरप की तस्करी की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विकास सिंह का बेटा वरुण सिंह भी इस पूरे खेल का एक प्रमुख हिस्सा है। वरुण के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन के सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं, जो सीधे तौर पर तस्करी से जुड़ी धनराशि की ओर इशारा करते हैं। वर्तमान में वरुण सिंह फरार है और माना जा रहा है कि वह मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के साथ दुबई भाग चुका है, जिसके चलते उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे पूर्व, पुलिस ने जांच के दौरान विकास सिंह की पत्नी और एक शराब अनुज्ञापी को भी कफ सीरप प्रकरण में संलिप्तता के कारण गिरफ्तार किया था। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं और नेटवर्क के अन्य ठिकानों की छानबीन की जा रही है।
गिरोह का विस्तार और जांच का भविष्य
यह मामला 2000 करोड़ रुपये के अवैध कफ सीरप व्यापार से जुड़ा है, जो देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विकास सिंह की गिरफ्तारी से गिरोह के काम करने के तरीके और अवैध धन के प्रवाह की परतें खुलने की उम्मीद है। रांची में एजेंसी खोलकर और फर्जी कागजात तैयार करके शुभम जायसवाल जैसे लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम को गुमराह करने का प्रयास किया था। पुलिस का मानना है कि वरुण सिंह की फरारगी और दुबई कनेक्शन इस मामले की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को जोड़ सकता है। पुलिस विभाग अब उन सभी दस्तावेजों की गहन समीक्षा कर रहा है जो शांभवी फार्मा और शैली ट्रेडर्स के नाम पर जारी किए गए थे। स्थानीय प्रशासन और ड्रग विभाग के अधिकारियों से भी इस पूरे प्रकरण में हुई चूक पर रिपोर्ट मांगी जा सकती है। फिलहाल पुलिस टीम विकास सिंह से पूछताछ कर फरार अभियुक्तों के सटीक ठिकानों और तस्करी के अन्य साझेदारों के बारे में जानकारी जुटाने में जुटी है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सबूतों को मजबूत किया जा रहा है।