फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर व्यापारी का अपहरण घटना की शुरुआत राजधानी लखनऊ से हुई जहाँ कुछ अज्ञात बदमाशों ने सुनियोजित तरीके से एक स्थानीय कारोबारी को अपना शिकार बनाया और उसे दबोच लिया। अपराधियों ने खुद को कानून का नुमाइंदा और पुलिस विभाग का अधिकारी बताते हुए व्यापारी पर धौंस जमाई और उसे जबरन एक वाहन में बिठाकर अपने साथ ले गए। अपहरण के बाद बदमाशों ने पीड़ित को छोड़ने के एवज में उसकी पत्नी से संपर्क साधा और भारी भरकम फिरौती की मांग रख दी। जब परिजनों ने घबराकर और अपनी मजबूरी में तेरह लाख रुपये की नकदी का इंतजाम करके आरोपियों को पहुंचाई, तब जाकर बदमाशों ने राहत की सांस लेने की बात कही। इस दौरान अपराधियों ने केवल फिरौती तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पीड़ित को लगातार गाड़ी में बिठाकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों की सड़कों पर घुमाया और रास्ते भर उसके साथ बुरी तरह मारपीट भी की, जिससे कारोबारी शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया।
आगरा और कन्नौज तक पीटते हुए घुमाने की खौफनाक वारदात कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए इन शातिर अपराधियों ने अपहरण के बाद पीड़ित कारोबारी को लखनऊ से निकालकर आगरा और कन्नौज की सीमाओं तक का लंबा सफर तय कराया। चलती गाड़ी के भीतर उस बेबस व्यापारी को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता रहा ताकि वह किसी भी तरह के विरोध का दुस्साहस न कर सके। इस प्रकार की घटनाएं आमतौर पर संगठित गिरोहों के तौर-तरीकों की ओर इशारा करती हैं जो पुलिस की वर्दी या उनकी कार्यशैली का दुरुपयोग करके आम नागरिकों को अपना आसान निशाना बनाते हैं। इस तरह के अपराध न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा पर एक गहरा आघात हैं, बल्कि समाज में उस भरोसे को भी डगमगाते हैं जो आम लोग कानून लागू करने वाली एजेंसियों और उनके अधिकारियों पर रखते हैं। जब अपराधी इस तरह के दुस्साहस का परिचय देते हुए खुलेआम एक जिले से दूसरे जिले तक वाहन में पीड़ित को बंधक बनाकर घुमाते हैं, तो यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र के सामने भी एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर देता है कि आखिर इतनी लंबी दूरी तक इन बदमाशों को रोकने वाला कोई क्यों नहीं मिला।
व्यापार जगत में दहशत और पुलिस जांच की दिशा इस सनसनीखेज वारदात के सामने आने के बाद से लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश के व्यापारिक समुदायों और उद्योगपतियों के बीच गहरी चिंता और भय का वातावरण व्याप्त हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि इस तरह से दिनदहाड़े या सुनियोजित तरीके से फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को उठाया जाने लगा, तो खुलेआम व्यापार करना और अपने काम के सिलसिले में बाहर निकलना बेहद असुरक्षित हो जाएगा। इस गंभीर मामले की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और संबंधित अपराध शाखा की टीमें हरकत में आ गई हैं और आरोपियों की पहचान तथा धरपकड़ के लिए तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मुख्य फोकस उस मोबाइल नंबर और बैंक खातों की पड़ताल करना है जिनके जरिए तेरह लाख रुपये की फिरौती की रकम का लेनदेन किया गया था ताकि उन तक पहुँचा जा सके। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर इन नकाबपोश या फर्जी पुलिसकर्मियों का भंडाफोड़ किया जाएगा और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करके कड़ी सजा दिलाई जाएगी।